संक्रामक बीमारियों के कहर के चलते एक महिला समेत दो लोगों की मौत हो गई। शनिवार को महिला की मौत कानपुर के निजी अस्पताल में डेंगू की पुष्टि होने के बाद हुई, जबकि युवक ने कानपुर ले जाते समय रास्ते में दम तोड़ दिया।
भिटौरा विकास खंड क्षेत्र के महोई गांव निवासी शफीक (32) को चार दिन से बुखार आ रहा था। शुक्रवार को परिजन जिला अस्पताल से इलाज कराकर घर ले गए थे। शनिवार की सुबह हालत बिगड़ने पर परिजन कानपुर ले जा रहे थे। समाजवादी एंबुलेंस में शफीक ने मलवां के समीप दम तोड़ दिया।
बिंदकी प्रतिनिधि के अनुसार जाफरगंज निवासी लखनलाल ओमर की पत्नी 56 वर्षीय गिरजा देवी एक सप्ताह से बुखार की चपेट में थी। परिजनों ने पहले झोला छाप से इलाज कराया। हालत में सुधार न होने पर गुरुवार को कानपुर के मधुराज हास्पिटल में भर्ती कराया। जांच में डेंगू होने की पुष्टि हुई।
शनिवार को महिला की इलाज के दौरान मौत हो गई। उधर, जिला अस्पताल की ओपीडी में छह सौ बुखार रोगियों ने पंजीयन कराया गया। जिनमें 186 रोगियों की स्लाइडें बनाई गई। असोथर ब्लाक के रमशोलेपुर निवासी भोला निषाद, रामदीन बुखार का इलाज कराने जिला अस्पताल पहुंचे।
उन्होंने बताया कि पीएचसी असोथर में डाक्टरों के बैठने का कोई समय नहीं है। स्लाइडें बनाई जाती हैं, लेकिन जांच रिपोर्ट की जानकारी नहीं होती है। रात के समय तबियत अधिक खराब होने पर अस्पताल में कई नहीं मिलता है। ऐसी हालत में रोगी को प्राइवेट अस्पतालों की शरण लेना मजबूरी है। यह रोगी तो बानगी के तौर पर हैं, जिला अस्पताल में आने वाले बहुतायत बुखार रोगी ग्रामीण क्षेत्रों के आ रहे हैं। क्षेत्रीय सरकारी अस्पतालों में उपचार न मिलने के कारण सदर अस्पताल में रोगियों की संख्या बढ़ती जा रही है।
सीएमओ वीके पांडेय का कहना है कि सभी पीएचसी, सीएचसी प्रभारियों को चौबीस घंटे अस्पताल परिसर में रहने के निर्देश हैं। निरीक्षण में अगर डाक्टर या फिर अन्य कोई कर्मचारी गायब मिलता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाती है। उन्होंने सभी रोगियों से क्षेत्रीय अस्पताल में डाक्टर न मिलने पर शिकायत करने की अपील की है।