जहानाबाद (फतेहपुर)। वर्ष 2017 से लापता रामशरण द्विवेदी के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोमवार को तीसरी बंदी प्रत्यक्षीकरण (हैबियस कॉर्पस) याचिका पर सुनवाई की। याची पक्ष ने मामले की जांच सीबीआई को सौंपने की मांग की।
हाईकोर्ट ने इस मांग पर विचार करने और सीबीआई से केस लेने की सहमति के संबंध में जानकारी लेने के बाद निर्णय लेने की बात कही है। मामले की अगली सुनवाई 28 जुलाई को होगी। माना जा रहा है कि जांच सीबीआई को सौंपी जा सकती है।
बता दें कि प्रकरण में 22 सितंबर 2025 को तत्कालीन एडीजी संजीव गुप्ता और एसपी अनूप कुमार सिंह को हाईकोर्ट ने तलब किया है। इससे पहले भी कई अधिकारियों को अदालत में तलब किया जा चुका है।
कानपुर नगर के साढ़ थाना क्षेत्र के महोलिया गांव निवासी रामशरण द्विवेदी, मंझले भाई कौशल किशोर के साथ कस्बा जहानाबाद की ठकुरनगली में रहते थे। उनके बड़े भाई रामनारायण कानपुर में रहते हैं। जहानाबाद पुलिस ने पांच अप्रैल 2016 को रामशरण द्विवेदी समेत दो लोगों को गिरफ्तार किया था। उनके कमरे से हाथी दांत, पुलिस का वायरलेस सेट, बारहसिंघा के सींग सहित अन्य सामान बरामद होने का दावा किया गया था।
रामशरण चार दिसंबर 2017 को अपने अधिवक्ता के साथ शहर कचहरी जाते समय जहानाबाद से लापता हो गए थे। कोर्ट के आदेश पर वर्ष 2018 में तत्कालीन थानाध्यक्ष धर्मेंद्र कुमार समेत आठ पुलिसकर्मियों के खिलाफ अपहरण का मुकदमा दर्ज किया गया।
हालांकि अब तक उनका पता नहीं चल सका है। इस बीच पुलिस ने कई बार केस बंद करने का प्रयास किया लेकिन इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका स्वीकार कर सुनवाई जारी रखी।
रामशरण की तलाश के लिए एसआईटी भी गठित की गई है। सितंबर 2025 से जांच के बावजूद अब तक कोई सुराग नहीं मिला है। सोमवार को हुई सुनवाई में अपहृत के भाई रामनारायण के अधिवक्ता ने एसआईटी की जांच पर सवाल उठाते हुए सीबीआई जांच की मांग की।
एसपी अभिमन्यु मांगलिक ने बताया कि हाईकोर्ट ने सीबीआई जांच की मांग पर विचार करने और सीबीआई से केस लेने के संबंध में जानकारी प्राप्त करने के बाद निर्णय लेने की बात कही है।