बिना हेलमेट लगाए स्कूटी चलाना सीखते वक्त हुए हादसे में महिला की मौत हो गई। ड्राइविंग की ट्रेनिंग बाइक एजेंसी की ओर से दिया जा रहा था, लेकिन मौके पर न तो सुरक्षा के इंतजाम थे और न ही ड्राइविंग के बाबत प्रशासन से इजाजत ली गई थी। इतना ही नहीं ट्रेनर के पास भी कोई लाइसेंस नहीं था।
मनमानी तरीके से यह ट्रेनिंग करीब सप्ताहभर से चल रही थी, लेकिन परिवहन विभाग एवं प्रशासन बेखबर रहा।
शहर में स्थित फतेहपुर किं कर ऑटो सेल्स की ओर से आईटीआई ग्राउंड पर महिलाओं को मुफ्त में ड्राइविंग सीखाई जा रही थी।
यहां सप्ताहभर से इलाहाबाद बमरौली क्षेत्र के केशवपुर के मूल निवासी एवं वर्तमान में शहर के रानी कालोनी में रहने वाले प्रापर्टी डीलर जयदीप मालवीय की पत्नी आभा मालवीय (32) भी ड्राइविंग सीखने आ रही थी। गुरुवार को उन्हें प्रीती नामक ट्रेनर ड्राइविंग सीखा रही थी।
इस दौरान ग्राउंड पर ड्राइविंग सीखने के कोई भी सुरक्षा इंतजाम नहीं थे। लापरवाही की हद यह थी कि आभा को हेलेमेल भी पहनाने की जरूरत नहीं समझी गई। ट्रेनर ने उन्हें बिना नंबर की स्कूटी दी।
जैसे ही आभा ने स्कूटी स्टार्ट किया, उसकी रफ्तार तेज हो गई। महिला कुछ समझ पाती कि स्कूटी ग्राउंड के अंदर ही कुछ ऊपर बनी सड़क से जाकर टकरा गई।
टक्कर इतनी तेज थी कि महिला हवा में करीब पांच फिट उछलकर आईटीआई बिल्डिंग की दीवार में जा टकराई। हादसे में गंभीर रूप से घायल महिला को जिला अस्पताल पहुंचाया गया। जहां डाक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। कोतवाल केके यादव ने बताया कि मामले में एजेंसी संचालक और ट्रेनर के खिलाफ लापरवाही रिपोर्ट दर्ज की जाएगी। ट्रेनिंग के दौरान लापरवाही बरती गई है।
एजेंसी संचालक बिना किसी अनुमति के ड्राइविंग सिखा रहे थे और ड्राइविंग सिखाने के दौरान मानकों की अनदेखी की गई। डीएम की अनुमति के बाद रात को ही शव का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है।
लापरवाही ने ले ली महिला की जान
फतेहपुर। आटीआई ग्राउंड पर विवाहिता की मौत कारण बनी लापरवाही। यह लापरवाही हर स्तर पर हुई है। ट्रेनरों से लेकर ट्रेनिंग लेने वाली महिला को भी हेलमेट की याद नहीं आई। गंभीर बात यह है कि सप्ताहभर से मैदान में ड्राइविंग की ट्रेनिंग दी जा रही है, लेकिन इस दौरान परिवहन विभाग और स्थानीय पुलिस आंख बंद किए रही। जबकि एजेंसी संचालक की ओर से ग्राउंड पर ड्राइविंग ट्रेनिंग की इजाजत नहीं ली गई थी। हादसे के बाद पुलिस भी सक्रिय हुई है और एआरटीओ भी कार्रवाई की दुहाई दे रहे हैं, लेकिन शहर में चलने वाले इस खेल को समय रहते खत्म करने की किसी ने जरूरत नहीं समझी। इस लापरवाही का नतीजा है कि विवाहिता की जान चली गई।
टेस्ट ड्राइव में भी लाइसेंस जरूरी
टू व्हीलर कंपनियां वाहनों को बेचने के लिये हर हद तक उतर जाती है। एजेंसियों में ग्राहक को फौरन बाइकें टेस्ट ड्राइव के लिये दे दी जाती है। जबकि टेस्ट ड्राइव से पहले चालक का ड्राइविंग लाइसेंस देखा जाना जरूरी है। अगर लाइसेंस हो तभी टेस्ट ड्राइव के लिये ग्राहक को बाइक देनी चाहिये।
तीन साल में ही उजड़ गया परिवार
इलाहाबाद के मूल निवासी जयदीप मालवीय ने जिले के पॉलीटेक्निक से शिक्षा दीक्षा शुरू की थी। इसके बाद वह यहीं पर प्रापर्टी डीलर का काम करने लगे। करीब तीन साल पहले इलाहाबाद की आभा तिवारी के साथ उनकी शादी हुी. दंपती की दो साल की बेटी भी है। मृतका आभा ने हाल ही में नर्सिंग का कोर्स पूरा किया और उसकी जल्द ही नौकरी भी लगने वाली थी। लेकिन समय को कुछ और ही मंजूर था।
बाइक बेचने के लिए कर रहे जिंदगी से खिलवाड़
एजेंसियों की कारगुजारी से पुलिस और प्रशासन को नहीं रहता कोई मतलब
फतेहपुर। टू व्हीलर एजेंसियां वाहनों को बेचने के लालच में जिंदगियों के साथ खिलवाड़ कर रही है। ड्राइविंग प्रशिक्षण के दौरान हुई विवाहिता का मौत, इसका साक्षात प्रमाण है। एजेंसी की ओर से महिलाओं को ड्राइविंग सिखाने के पीछे असल मकसद स्कूटी वाहनों की सेल बढ़ाने का रहा है। स्कूटी वाहनों की बिक्री के लिये महिलाओं को फ्री में ट्रेनिंग देने का प्रलोभन एजेंसी की ओर से दिया गया था। इसमें एजेंसी संचालकों की सोच थी कि उनकी कंपनी के वाहन में ही महिलाएं गाड़ी चलाना सीखेंगी तो उसेे ही खरीदेंगी। एजेंसी की ओर चलाई जा रही योजना में महिलाओं को एक फार्म भी भराया जाता है। इसी चक्कर में हाल में ही नर्सिंग का कोर्स पूरा करने के बाद आभा मालवीय और उसकी तीन महिला मित्र भी स्कूटी लेने के इरादे से ड्राइविंग सीखने जाती थीं। एजेंसी संचालक और ट्रेनर ने ड्राइविंग सीखने के दौरान अपनाए जाने वाले सुरक्षा मानकों की भी अनदेखई कर दी, जिसका नतीजा था कि महिला की मौत हो गई। शहर के पथरकटा स्थित किंकर ऑटो सेल्स के संचालक एवं सादीपुर रोड नहर कालोनी निवासी प्रवीण कुमार ने स्वीकार किया कि स्कूटी ट्रेनिंग का कोई रजिस्ट्रेशन नहीं है। वह ट्रेनर को भेजकर महिलाओं को मुफ्त प्रशिक्षण देते हैं।
प्रशिक्षण देने वाली संस्था की लापरवाही
1- एजेंसी को ड्राइविंग सिखाने की अनुमति नहीं है, फिर भी सीखाने लगी।
2- ट्रेनर के पास भी ड्राइविंग लाइंसेस नहीं है। इसके बाद भी वह ट्रेनिंग दे रही थी।
3- ट्रेनर को पीछे की सीट में स्कूटी सिखाते पीछे बैठना चाहिए था, लेकिन मृतका अकेले ड्राइव कर रही थी।
4- बाइक चलाते समय हर व्यक्ति को अनिवार्य रूप से हेलमेल लगाना चाहिए, लेकिन मृतका ने हेलमेट नहीं लगाया।
5- स्कूटी में न ही कोई नंबर था और न ही उसका रजिस्ट्रेशन हुआ था। फिर यह स्कूटी सीखने के थमा दी गई।
6- आईटीआई मैदान में ट्रेनिंग दिए जाने की अनुमति भी नहीं ली गई थी।
ड्राइविंग सीखाने वाले स्कूलों के मानक
1- ट्रांसपोर्ट कमिश्नर की ओर से ट्रेनिंग स्कूल का होता है रजिस्ट्रेशन।
2- ट्रेनिंग स्कूल का तीन हजार वर्ग मीटर का होना चाहिए मैदान।
3- वाहन सिखाने वाले के पास कार्मिशियल लाइसेंस होना चाहिए।
4- वाहन सीखने वाले का पहले बनाना चाहिए लर्निंग लाइसेंस।
5- ट्रेनर को वाहन सीखने वाले के साथ जरूर होना चाहिए।
6- ड्राइविंग सीखने एवं सीखाने वाले के लिए हेलमेल अनिवार्य है।
क्या कहते हैं जिम्मेदार
जिले की किसी वाहन एजेंसी के पास किसी प्रकार का ड्राइविंग सिखाने का रजिस्ट्रेशन नहीं है। महिला की मौत के बाद एजेंसी संचालकों के द्वारा ड्राइविंग सिखाये जाने का मामला पहली बार आया है। इस तरह से दुर्घटनाओं की अधिक संभावनाएं हैं। वह विभागीय स्तर से मामले की पड़ताल कराएंगे। उनके विभाग से होने वाली सारी कार्रवाइयां की जायेगी और मोटर ड्राइविंग स्कूलों की भी पड़ताल की जायेगी। - बीएल त्रिपाठी-एआरटीओ प्रशासन