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रिश्वत लेते दबोचा गया एडीएम का स्टेनो

Sat, 06 May 2017 12:31 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, फतेहपुर
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in custody - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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औंग थाना क्षेत्र के गंगचौली खुर्द गांव निवासी प्रवीण कुमार ने स्टांप का लाइसेंस लेने के लिए जिलाधिकारी कार्यालय में आवेदन किया था। टीम प्रभारी रामकुमार श्रीवास्तव ने बताया कि आवेदनकर्ता प्रवीण और अपर जिलाधिकारी के स्टेनो मोहम्मद शाहिद के बीच बातचीत हुई थी। स्टेनो ने आवेदक से 20 हजार रुपये मांगे थे। भरोसा दिया था कि वह लाइसेंस दिलवा देगा। शिकायतकर्ता की सूचना पर विजलेंस टीम इलाहाबाद से दोपहर में फतेहपुर पहुंची।  पीड़ित के साथ मिलकर स्टेनो से मुलाकात का वक्त मुकर्रर हुआ। स्टेनो ने पीड़ित को अपने सरकारी आवास सिविल लाइंस बुलाया। वह दो-दो हजार के नोट लेकर स्टेनो के पास पहुंचा। काम के बारे में बातचीत की और स्टेनो को नोट थमाकर बाहर आ गया। इसके तत्काल बाद विजिलेंस टीम ने आरोपी स्टेनो के घर में छापा डाल दिया। स्टेनो की जेब से पूरी रकम बरामद हुई। टीम स्टेनो को लेकर कोतवाली पहुुंची। शिकायतकर्ता की तहरीर पर स्टेनो मोहम्मद शाहिद के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई है। आरोपी इलाहाबाद जिले के करैली थानांतर्गत गौसनगर मुहल्ला निवासी हाजीदीन मोहम्मद का बेटा है। विजलेंस टीम में अभिसूचना संकलन कर्ता इंस्पेक्टर ज्ञानेंद्र शुक्ला, कपिल देव त्रिपाठी, रामनिहोरे मिश्र, सरोज कुमार सिंह, अशोक नारायण पांडेय, कमलेश कुमार सिंह, श्रवण कुमार, अशोक कुमार शर्मा भी मौजूद रहे। मामले की विवेचना सतर्कता अधिष्ठान के निरीक्षक अब्दुल हलीम को सौंपी गई है।

इनसेट :
कैमरे लगे तो निकाल लिया तोड़
रिश्वतखोरी रोकने और सीट पर वक्त की पाबंदी के साथ नौकरी करने के लिए जिलाधिकारी कार्यालय में कुछ दिन पहले ही सीसीटीवी कै मरे लगाए गए हैं। इस मामले से साफ हो गया कि विभागों में तैनात भ्रष्टाचारियों ने इसका भी तोड़ निकाल लिया है। अब वह घर या दूसरी जगह दुकानों, रेस्तरा में घूस ले रहे हैं।
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अधिकारियों से हर काम कराने का ठेका लेते हैं बाबू
विजिलेंस की गिरफ्त में पहले भी आ चुके
 रिश्वत न मिलने पर स्टेनो ने सहकर्मी को भी था टरकाया
अमर उजाला ब्यूरो
फतेहपुर। सरकारी मशीनरी में ‘बाबू’ शब्द बड़ा ही अहम है। बिना उन्हें खुश किए कोई भी काम कराना मुश्किल ही नहीं लगभग नामुमकिन होता है। रिश्वत देने से इंकार किया तो काम को जलेबी बना देते हैं और पीड़ित चक्कर काटते-काटते परेशान होकर दोबारा बाबू की शरण में खुद ही पहुंच जाता है। यह हाल किसी एक विभाग का नहीं, अमूमन सभी का है। कुछ ही ऐसे लोग होते हैं जो उन्हें सबक सिखाने का साहस जुटा पाते हैं।
कलक्ट्रेट में अपर जिलाधिकारी के स्टेनो मोहम्मद शाहिद के  बारे में भी ऐसी ही विभाग में चर्चा अब आम हुई है। थाने में ही बताया गया कि उसने एक बार अपने एक सहकर्मी को भी रिश्वत न मिलने की वजह से रोक दिया था। जिसे लेकर दोनों के बीच नोकझोंक भी हुई थी। इससे पहले बीएसए दफ्तर के एक लिपिक को पांच साल पहले विजलेंस टीम ने पकड़ा था। तहसील विभाग में कानूनगो, सिंचाई विभाग के एक बाबू और पालिका विभाग में भी एक लिपिक पकड़ा जा चुका है। सालों से बाबू की सीटों पर भ्रष्टाचार व्याप्त है। जिसे उखाड़ फेंकने में प्रशासनिक अधिकारी सख्ती से कभी भी पेश नहीं आ सके हैं।
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घाघ स्टेनो से एडीएम भी थे त्रस्त-डीएम
फतेहपुर। रिश्वत के बीस हजार रुपये के साथ विजलेंस टीम के हत्थे चढ़े स्टेनो मोहम्मद शाहिद को डीएम मदन पाल आर्य ने घाघ करार दिया। उन्होंने कहा कि इससे तो एडीएम खुद त्रस्त थे। जिले मेें स्टेनो कम होने की वजह से दूसरे जिले में नियुक्त इस स्टेनो को यहां अटैच किया गया था। उन्होंने मुलाजिमों को रिश्वतखोरी से बाज आने की हिदायत दी है। कहा कि विजलेंस टीम बाद में काम करेगी। उन्हें शिकायत मिली तो खैर नहीं।
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