घंघौल बिलारीमऊ गांव में संविदा कर्मी सुरेंद्र की
मौत पर ग्रामीणों में गुस्सा पुलिस के रवैये को लेकर भी रहा। पुलिस
घटनास्थल पर करीब सवा घंटे बाद पहुंची। बता दें कि अभी एक दिन पहले ही नए
एसपी कलानिधि नैथानी ने पांच मिनट में घटनास्थल पर पुलिस के पहुंचने का
दावा किया था।
दिहाड़ी मजदूर पोल पर सुबह करीब साढ़े 10 बजे चढ़ा था।
इसके बाद दस मिनट के अंदर घटना हो गई थी। घटना के बाद इलाकाई ग्रामीण मौके
पर पहुंचे। ग्रामीणों ने कुछ ही देर बाद पुलिस को घटना की खबर दी।
इसके बाद
भी पुलिस दोपहर के सवा 12 बजे पहुंची। इससे ग्रामीणों में नाराजगी रही।
ग्रामीणों ने बताया कि पुलिस सूचना के करीब दो घंटे बाद घटनास्थल पर आई थी।
तब तक घटना में सारे झुलसे दिहाड़ी मजदूरों को अस्पताल के लिए रवाना किया
जा चुका था। पुलिस के पास झुलसे मजदूरों का ब्योरा तक नहीं है।
पुलिस की कार्यशैली पर प्रश्नचिह्न
- थानों की पुलिस व्यक्ति विशेष की सूचना पर नहीं रखती विश्वास।
- कंट्रोल रूम से सूचना मिलने पर ही थाने से हिलती है पुलिस।
- लोगों की सूचना पर लिखित तहरीर नहीं आने का करती बहाना।
परिजनों में मचा रहा कोहराम
हादसे
में मरे सुरेंद्र के परिजनों में कोहराम मच गया। सुरेंद्र की मां रमदेइया
और बहन राधा दहाड़ मारकर रोती बिलखती रही। गांव की महिलाआें ने उन्हें
ढांढस बंधाया। अब परिवार में सुरेंद्र का छोटा भाई महेंद्र है। सुरेंद्र पर
ही परिवार की सारी जिम्मेदारियां थी। सुरेंद्र के पिता झूरीलाल भट्ठे में
मजदूरी करते हैं। एक बड़ी बहन रानी है, जिसकी शादी हो चुकी है। परिवार के
लोग बड़े बेटे सुरेंद्र की शादी के लिए लड़की खोज रहे थे। परिवार की सारी
खुशियां बडे़ बेटे की मौत से काफूर हो गई।