जहानाबाद बवाल के बाद सांप्रदायिक तनाव कम करना पुलिस
व प्रशासन के लिए चुनौती बन गया है। तीसरे दिन भी बाजार खुलवाने और लोगों
के जेहन में बसे दहशत को दूर करने के हथकंडे नाकाम रहे। डीएम राजीव रौतेला,
डीआईजी भगवान स्वरूप श्रीवास्तव व एसपी राजीव मल्होत्रा के सामने इलाकाई
लोगों की जुबां पर एक ही बात आई कि साहब, अभी कर्फ्यू रहने दो। बाजार बंद
रहने में ही शांति है। जहानाबाद बवाल में हो रही पुलिस की कार्रवाई को लेकर
विरोध शुरू हो गया है।
सपा व भाजपा नेताओं का अलग-अलग जमावड़ा लगा
रहा। कानपुर से जहानाबाद आए शहर काजी आलम रजा नूरी चार मौलाना के साथ लोगों
से मिले। उन्होंने सौहार्द बनाए रखने की अपील की।
सपा के पूर्व सांसद
राकेश सचान ने अधिकारियों और कस्बेवासियों से मुलाकात कर ढांढस बंधाया।
पुलिस ने कस्बा इंचार्ज दिलीप कटियार की तहरीर पर दारागंज में बवाल करने
वाले दोनो वर्गों के 14 लोगों को नामजद किया है।
बवाल की चपेट में आने वाले
सात पीड़ितों की ओर से सैकड़ों उपद्रवियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई
है। पुलिस ने छापेमारी कर शनिवार को भी करीब 12 लोगों को हिरासत में लिया
है।
दोपहर बाद रामतलाई मंदिर परिसर में भाजपा सदर विधायक विक्रम सिंह
समेत आधा सैकड़ा भाजपाइयों का काफिला पहुंचा। हिंदू अनुयायियों के साथ
मंदिर प्रांगण में मीटिंग की गई।
कहा गया कि जुलूस में उपद्रव प्रशासनिक
चूक के चलते हुआ। कुछ लोगों ने सोची समझी साजिश के चलते उपद्रव कराया है।
सपा पूर्व सांसद राकेश सचान ने दोनों धर्म के लोगों से धार्मिक
प्रतिद्वंद्विता को कम करने की अपील की है।
उन्होंने बताया कि पुलिस
छापेमारी को रोक दे। पुलिस की भी लोगों के बीच दहशत है। शनिवार दोपहर
डीएम, डीआईजी व एसपी ने कस्बे के लोगों से बातचीत कर दुकानें खुलवाने का
प्रयास किया।
वह इक्का दुक्का दुकानें ही खुलवा सके। दहशत के चलते लोग
रिस्क लेने को तैयार नहीं दिखे। डीएम ने लोगों को सुरक्षा का भरोसा दिलाया
लेकिन दहशत दूर नहीं की जा सकी।
डीएम ने कहा कि जल्द ही हालात सामान्य कर
लिए जाएंगे। शनिवार और रविवार की छुट्टी के चलते भी लोग दुकान खोलने की
बजाय घर पर रहना मुनासिब समझ रहे हैं।
इधर, प्रभावित इलाकों में दिन-रात
आरएएफ, पीएसी और पुलिस बल तैनात है। गश्त कर लोगों को सुरक्षा का भरोसा
दिया जा रहा है। हालांकि तनावपूर्ण शांति के चलते पुलिस और आम जनता दोनों
उधेड़बुन में फंसे हैं।