अमर उजाला ब्यूरो
किशनपुर। गरीबों को स्वास्थ्य सेवाएं देने के सरकार के दावे की कलई मैकी देवी संग हुई घटना के बाद खुल गई है। जंगली जानवर की शिकार महिला लचर स्वास्थ्य सेवाओं के चलते अपनी अंतिम सांसें गिन रही है। उसे मांग के अनुरूप पैसा न होने से कानपुर हैलट से भगा दिया गया। सीएचसी से हायर सेंटर तक इलाज के लिए घूमने के बाद घायल पीड़िता अब अपनी झोपड़ी में तड़प रही है।
किशनपुर थाना क्षेत्र के अगलेहार गांव निवासी रामआसरे की पत्नी मैकी देवी (65) शुक्रवार की रात घर के बाहर छप्पर के नीचे सो रही थी। जंगली जानवर ने वृद्धा पर हमला कर दिया। वह वृद्धा को घसीटकर ले जा रहा था। चीख सुनकर परिजन और ग्रामीण पहुंचे। किसी तरह चीते के जैसे दिखने वाले जंगली जानवर को भगा सके थे। तब तक वृद्धा के हाथ का पंजा जानवर नोंच चुका था। वृद्धा को हरदों सीएचसी से जिला अस्पताल फिर हैलट कानपुर रेफर किया था। हैलट में 30 से 40 हजार का डाक्टरों ने खर्च बता डाला। बेटे दिनेश ने बताया कि डाक्टरों ने उससे सीधे तौर पर कहा कि रुपये नहीं तो यहां से चले जाओ। वृद्धा को लेकर परिवार शनिवार की रात लौट आया। रविवार को वृद्धा घर के बाहर पुआल के ढेर में तड़पती दिखी। उसके पास दर्द की दवा तक रुपये नहीं है। घटना ने मानवता को शर्मसार कर दिया है। उधर, वन विभाग की टीम जांच करने मौके पर नहीं पहुंची। करीब 70 किलो वजन की वृद्धा घसीटने और जिंदा मांस चबा जाने वाले जानवर की दहशत ग्रामीणों में बनी है।
कोट्स
हैलट में इलाज किन हालातों में नहीं हो सका है इसके बारे में वह नहीं बता सकते हैं। यहां के जिला अस्पताल में वृद्धा के इलाज के लिए जो भी हो सकेगा उसका इंतजाम कराया जाएगा।
डा. विनय कुमार पांडेय-सीएमओ
कोट्स
उनके संज्ञान में मामला नहीं आया था। वह लखनऊ में हैं। सेक्टर प्रमुख को भेजकर वृद्धा के परिजनों से बात करेगी और उसके इलाज का इंतजाम करेगी।
कृष्णा पासवान-क्षेत्रीय विधायक