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कातिल ने पुलिस तक पहुंचाई कुएं में शव होने की खबर

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फतेहपुर/अल्लीपुर। अपहृत किशोर शिवकांत की तलाश में जुटी पुलिस जब अचानक दोपहर एक बजे कुएं के पास पहुंची तो सभी लोग चौंक गए। लेकिन इससे बड़ा झटका तब उन्हें लगा जब कुएं से पुलिस ने शिवकांत की लाश बरामद की।
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दरअसल, पुलिस की सक्रियता देख कातिल ने ही अपने नेटवर्क तक यह बात जानकारी पहुंचाई कि कुएं में शिवकांत की लाश पड़ी है। कातिल ने जिस दांव को चलकर बचने का प्रयास किया अब वही उल्टा पड़ गया है। पुलिस सूचना देने वाले की मदद से अब कातिल तक पहुंचने में लगी है। सूत्र बता रहे हैं कि पुलिस हत्यारे के बहुत करीब है और कभी भी उसे गिरफ्तार किया जा सकता है।
मलवां पुलिस और क्राइम ब्रांच की दो टीमें दो जून की शाम से ही शिवकांत की तलाश में लगी हुई थीं। शिवकांत के पिता सुनील बाबू के पास दो जून की शाम एक ही नंबर से दो बार फोन आया। फोन करने वाले ने 20 लाख की फिरौती मांगी।
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जिस नंबर से फोन किया गया वह सुनील बाबू की पत्नी का था। शिवकांत एक जून की रात को अपनी मां का मोबाइल लेकर घर से निकला था। पुलिस ने जब मोबाइल को सर्विलांस के जरिए चेक किया तो यह मोबाइल गांव से एक किमी दूर था, यानी अपहरण करने वाला व्यक्ति गांव के आसपास का ही था।
इसके बाद यह नंबर बंद हो गया। पुलिस ने नंबर के जरिए और दुश्मनी की आशंका के चलते छह लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की तो शुक्रवार की सुबह पुलिस को शव कुएं में होने की खबर मिली। जिसके बाद पुलिस टीमें व अधिकारी कुएं के पास पहुंच गए। पुलिस तक यह सूचना कैसे पहुंची यह तो गोपनीय रखा गया है लेकिन पुलिस इसी सूचना के एक सिरे से दूसरे तक पहुंचने में जुटी है। काफी हद तक उसे सफलता भी मिल गई है।
छेदा चौराहा के पास खेत में मिला खून
अल्लीपुर। शिवपुर गांव से करीब डेढ़ किमी दूर छेदा चौराहा के पास एक खेत में लोगों को खून पड़ा मिला तो उन्होंने पुलिस को खबर दी। पुलिस व फॉरेंसिक टीम मौके पर पहुंची और जांच की तो पता चला कि खून इंसान का नहीं है। जांच टीम के लीडर सत्येंद्र त्रिपाठी ने बताया कि ब्लड सैंपल को एक किट पर डालने से अगर एक लकीर बनती है तो रक्त इंसान का नहीं होता। दो लकीरे स्पष्ट होने पर मानव रक्त की पुष्टि होती है। हालांकि टीम ने ब्लड सैंपल लेकर उसे जांच के लिए गोरखपुर लैब भेजा है।
जमीन को लेकर भी कुछ लोग बना रहे थे दबाव
पूछताछ के दौरान पुलिस को सुनील बाबू की जमीन को लेकर एक अहम जानकारी पता चली। बताया गया कि सुनील बाबू की कुछ जमीन को गांव के एक व्यक्ति द्वारा लेने का प्रयास किया जा रहा था। हालांकि सुनील इसके लिए तैयार नहीं थे।
लेकिन साल भर से उक्त व्यक्ति सुनील बाबू से जमीन को लेकर संपर्क में था। पिछले सप्ताहभर से जमीन के लिए उक्त व्यक्ति सुनील पर कुछ ज्यादा दबाव बना रहा था। पुलिस ने इस व्यक्ति को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की है।
वीडियोग्राफी के बीच हुआ पोस्टमार्टम
शिवकांत का पोस्टमार्टम डीएम के निर्देश पर डाक्टर पैनल के द्वारा कराया गया। इस दौरान पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी भी कराई गई। इसके बाद शव को परिजन आदमपुर गंगा किनारे ले गए। पुलिस की मौजूदगी में शव का अंतिम संस्कार हुआ।
अकेले ही शिवकांत गांव से बाहर निकला
पुलिस ने गांव के लोगों से पूछताछ की तो एक चश्मदीद ऐसा मिला, जिसने पुलिस को बताया कि एक जून की रात को शिवकांत अकेले गांव से बाहर जाते हुए देखा गया था। ऐसे में पुलिस यह मान रही है कि शिवकांत गांव से बाहर किसी परिचित द्वारा बुलाए जाने पर ही जा सकता है। पुलिस प्रेम प्रसंग के बिंदु पर भी जांच कर रही है।
दुश्मनी बनी हत्या की वजह, अपहरण ड्रामा
पुलिस का मानना है कि शिवकांत की हत्या एक जून को ही कर दी गई थी और अगले दिन उसके फोन से फिरौती मांगी गई। अनुमान है कि शिवकांत की हत्या दुश्मनी के कारण की गई है।
पुलिस और परिजनों को भ्रमित करने के लिए अपहरण करने व फिरौती मांगने का ड्रामा किया गया। जिससे पुलिस दुश्मनी के बिंदु पर जांच न करके अपहरण पर फोकस करती रहे। फिरौती के लिए हत्या, किसी के गले इसलिए नहीं उतर रही है क्योंकि शिवकांत के पिता सुनील बाबू एक फैैक्ट्री में मजदूरी करते हैं और इससे पहले ई-रिक्शा चलाते थे। ऐसे में उनके पास देने के लिए 20 लाख रुपये नहीं थे। उनके पास कुल पांच बीघा पैतृक जमीन ही थी।
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