बिंदकी। 18 मई की शाम जहानपुर मोहल्ले से आठ साल की बच्ची के अपहरण की साजिश मां ने ही रची थी। पुलिस ने शनिवार को इसका खुलासा कर दिया। पुलिस ने आरोपी मां और मोहल्ले के एक युवक को गिरफ्तार किया है।
बताया गया कि पड़ोसी दो भाइयों को फंसाकर उनसे आठ लाख रुपये लेने के लिए यह साजिश रची गई थी। पुलिस ने लड़की को सकुशल बरामद किया है। घटना में प्रयुक्त बोलेरो, मोबाइल भी कब्जे में लिया है।
जहानपुर मोहल्ले की रहने वाली कुसमा देवी ने 18 मई की शाम पड़ोस के रहने वाले सगे भाइयों छोटू व किशन पर बेटी आरुषि (8) के अपहरण का आरोप लगाया था और बिंदकी कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया था।
एसपी ने बच्ची की बरामदगी के लिए तीन टीमें लगाई थीं। पुलिस लगातार छानबीन कर रही थी, तभी शुक्रवार की शाम को कानपुर के चकेरी में आरुषि स्थानीय पुलिस को सड़क किनारे मिली। पूछताछ के बाद जानकारी बिंदकी पुलिस को दी गई। शुक्रवार शाम को बिंदकी कोतवाली लाकर बच्ची से पुलिस ने पूछताछ की। इसके बाद इस अपहरणकांड का खुलासा कर दिया।
इंस्पेक्टर आशुतोष सिंह ने बताया कि अपहरण की साजिश आरुषि की मां कुसमा देवी ने रची थी। उसके साथ पड़ोस का रहने वाला विशाल श्रीवास्तव उर्फ गौतम शामिल था। पुलिस ने कुसमा व विशाल को गिरफ्तार किया और घटना में प्रयुक्त एक बोलेरो गाड़ी व मोबाइल बरामद किया है। अब आरोरी बनाए गए सगे भाइयों का नाम मुकदमे से हटाकर कुसमा और विशाल का नाम इसमें शामिल किया जाएगा।
आरोपियों को गिरफ्तार करने वाली टीम में उपनिरीक्षक रीतेश कुमार राय, हेड कांस्टेबल संदीप कुमार तिवारी, कांस्टेबल आशीष प्रथम, विवेक गुप्ता, आशीष कुमार, कृष्ण अवतार व महिला सिपाही सुरभि शामिल रही। पुलिस अधीक्षक ने टीम को 10 हजार रुपये का पुरस्कार दिया है।
पड़ोसी भाइयों को फंसाने की थी साजिश
पुलिस की जांच में खुलासा हुआ कि अपहरण की घटना से एक दिन पहले छोटू और किशन के घर आरुषि गई थी। दोनों भाइयों ने आरोप लगाया कि आरुषि ने उनके घर से करीब 800 रुपये चुराए हैं और इसका उलाहना भी दिया। इस बात को लेकर दोनों भाइयों व कुसमा देवी के बीच हाथापाई तक हुई थी। इसी झगड़े को कुसमा देवी ने कैश कराने की योजना बनाई और अपनी बेटी का अपहरण कराया।
12 कुत्तों के बीच तीन दिन रही आरुषि
18 मई की शाम अचानक गायब हुई आरुषि कहीं गई नहीं थी। वह चुपचाप आरोपी विशाल के घर जाकर बैठ गई। अपहरण का हल्ला मचा तो आरोपी विशाल श्रीवास्तव, योजना के तहत भीड़ में शामिल होकर पुलिस की निगरानी करने लगा। विशाल ने आरुषि को अपने घर के सबसे ऊपरी मंजिल पर बने कमरे में रखा। इस कमरे में विशाल ने करीब 12 कुत्ते भी पाल रखे हैं।
इसी कमरे में एक किनारे आरुषि को गुरुवार की रात तक रखा गया। आरुषि ने पुलिस को बताया कि जांच के दौरान पुलिस विशाल के घर भी पहुंची थी और केवल पूछताछ कर लौट गई थी। उस समय आरुषि सबसे ऊपर के कमरे से पुलिस टीम को एक लोहे के जाल के माध्यम से देख रही थी। तलाशी होती तो उसी दिन बरामदगी हो जाती।
शुक्रवार की सुबह बोलेरो से पहुंचे गांधी चौराहा
पूछताछ में यह पता चला कि गुरुवार की रात तक आरुषि जहानपुर मोहल्ले में विशाल के घर पर रही। शुक्रवार की तड़के विशाल ने अपनी बोलेरो से उसे गांधी चौराहा पहुंचाया और एक बस में बैठाकर कानपुर रवाना किया।
मां और विशाल ने उसे समझाया था कि वह कानपुर में पहुंचकर रामादेवी पुल के पास उतर जाए और पुलिस के पास जाकर अपहरण की बात बताए। आरुषि को यह बताना था कि उसका अपहरण छोटू व किशन ने किया था।
पुलिस को मां कुसमा देवी के फोन से एक रिकार्डिंग भी मिली, जिसमें वह आरुषि से फोन पर बात कर रही है। मां, कह रही थी कि अगर, पुलिस उससे पूछताछ करेगी तो उसे छोटू व किशन का नाम लेना है। अगर वह ऐसा नहीं करेगी तो उसे जान से मार डाला जाएगा।
आठ लाख रुपये में तय हुई थी डील
पुलिस तफ्तीश में एक बात और साफ हुई। अपहरण के तुरंत बाद विशाल ने एक नंबर से आरोपी बनाए गए किशन के पास फोन किया था। उसने कहा कि अगर वह जेल जाने से बचना चाहता है तो आठ लाख रुपये का इंतजाम कर ले। मुकदमा दोनों भाइयों के नाम पर था इसलिए वह घबराए हुए थे।
दोनों ने यह बात मान भी ली और बुधवार के ही दिन दो लाख रुपये देने की तैयारी कर रहे थे। कोतवाली प्रभारी ने बताया कि अगर विशाल पैसा पा जाता तो, आरुषि की हत्या कर दी जाती, क्योंकि जब वह किसी भी नाटक के तहत वापस आती तो पुलिस की पूछताछ में यह बात साफ होनी ही थी कि अपहरण किसने किया था।
पुलिस के दबाव में बदला प्लान पर फंस गए
कुसमा और विशाल ने यह योजना बनाई थी छोटू व किशन को अपहरण के नाम पर ब्लैकमेल कर रकम बंदरबांट कर ली जाएगी। मगर पुलिस तेजी से छानबीन कर रही थी। कुसमा, विशाल और अन्य रिश्तेदार पुलिस की निगाह में थे।
पुलिस के बढ़ते दबाव और रकम नहीं मिल पाने के कारण प्लान को बदला गया। आरुषि को चुपचाप शुक्रवार की सुबह गांधी चौराहे से एक बस में बैठाकर कानपुर भेजा गया और उसे बताया गया कि पुलिस से क्या कहना है। लेकिन जब पुलिस ने पूछा तो कहानी की जगह सच बाहर आ गया।