फतेहपुर। स्नातक की छात्रा को अगवा कर दुष्कर्म करने के मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट ने दोषी को दस साल सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। आरोपी पिता को दोषमुक्त कर दिया गया। अदालत के फैसले के बाद दोषी को जेल भेज दिया गया। मामला शहर कोतवाली क्षेत्र का है।
घटना 23 नवंबर 2015 की सुबह दस बजे घटित हुई। अधिवक्ता ने बताया कि छात्रा घर से कालेज के लिए निकली थी। बिंदकी के खिदिरपुर के विपिन उर्फ बीनू ने उसे रास्ते में रोक लिया। विपिन छात्रा को बोलेरो में अगवा कर ले गया। शाम को कालेज से छात्रा जब घर नहीं लौटी तो मां ने खोजबीन की। छात्रा के माता-पिता उसे तीन दिन तक खोजते रहे। जब बेटी का कहीं पता नहीं चला तो मां ने घटना के तीसरे दिन 26 नवंबर को कोतवाली में एफआईआर दर्ज कराई। पुलिस ने 14 मार्च को विपिन को छात्रा के साथ रेलवे स्टेशन पर देखा। पुलिस को देखकर विपिन फरार हो गया और पुलिस ने छात्रा को पकड़ लिया। तब से मामला न्यायालय में विचाराधीन था। इस प्रकरण में विपिन के पिता झुग्गी लाल को भी घटना का षड्यंत्र रचने का मुल्जिम पाया गया था। छात्रा को न्याय दिलाने के लिए अभियोजन पक्ष से अधिवक्ता आर्य प्रकाश सोनकर और सहायक शासकीय अधिवक्ता रहस बिहारी श्रीवास्तव अदालत में पैरवी कर रहे थे। इन्होंने न्यायालय के समक्ष छह गवाह प्रस्तुत किए। जिन पर विचार करते हुए अपर जिला जज कमलकांत श्रीवास्तव ने विपिन को दस वर्ष के सश्रम कारावास और 17 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड का भुगतान न करने पर आरोपी को एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। अदालत ने अर्थदंड की धनराशि से आठ हजार रुपये पीड़िता को देने का आदेश दिया है। कोर्ट ने विपिन के पिता झुग्गी लाल को निर्दोष पाते हुए दोषमुक्त कर दिया।
........