फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

थानों में रखे कंप्यूटर सेट महज दिखावे के लिए

Sat, 20 Dec 2014 12:50 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, फतेहपुर
विज्ञापन
विज्ञापन
जिले में क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग सिस्टम (सीसीटीएनएस) धड़ाम है। ज्यदातर थानों में पड़े कंप्यूटर धूल धूसरित हैं। सिटी सर्किल एवं बिंदकी को छोड़ दिया जाए तो ज्यादातर थानों में  इन पर न तो रिपोर्ट दर्ज की जा रही है और न ही इनके रखरखाव का इंतजाम है।
विज्ञापन

मालूम हो कि पुलिस की कार्यशैली में स्वच्छता और हाइटेक युग में अपराधियों से दो कदम आगे रहने की मंशा के साथ क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग सिस्टम (सीसीटीएनएस) लागू किया गया।

वर्ष 2009 में पुलिस मुख्यालय से जिले के 20 थानों में कंप्यूटर भेजे गये थे। मुख्यालय से किसी थाने में दो तो किसी में चार कंप्यूटर भेज दिए गए।

अलग-अलग बैच में 2012 और 2013 में सीसीटीएनएस के लिए पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षण भी दिया गया। प्रशिक्षण के बाद कुछ थानों में काम शुरू हुआ, लेकिन वक्त के साथ यह प्रणाली भी सुस्त पड़ने लगी।
विज्ञापन


आला अफसरों ने ध्यान देना बंद किया तो पुसिलकर्मी इस कंप्यूटर का प्रयोग गेम खेलने और चैटिंग तक ही सीमित कर दिए। अब तो स्थिति यह है कि ज्यादातर थानों में कंप्यूटर धूल धूसरित पड़े हैं।

इन पर न तो रिपोर्ट दर्ज की जाती है और न ही रिकार्ड फीड किए जा रहे हैं। दस दिन पहले इलाहाबाद रेंज के आईजी ने भी सीसीटीएनएस को लेकर जिले की पुलिस को फटकार लगा चुके हैं।

इसके बाद भी सिर्फ सर्किल सिटी और बिंदकी में कंप्यूटीकरण एफआईआर सेवा चल रही है। बाकी तीन सर्किल जाफरगंज, थरियांव, खागा में किसी तरह पुलिस अपनी गर्दन  बचाने में जुटी है।
 क्या कहते हैं जिम्मेदार
एसपी विनोद कुमार सिंह ने दावा किया कि सारे थानोें में कंप्यूटर पर एफआईआर फीडिंग चल रही है। जब उनसे थानेवार बात की गई तो बोले कि कुछ खामियां है, जिन्हें दूर किया जा रहा है। जल्द ही सबकुछ रूटीन पर आ जाएगा। उन्होंने माना कि थरियांव, धाता, खखरेरु, चांदपुर, जाफरगंज, असोथर थानों में दो-चार दिन पहले कंप्यूटरों से धूल की चादर हटाकर मुकदमा फीडिंग को गति देने का प्रयास किया जा रहा है। लेकिन इनमें तकनीकी खामी से समस्यायें सामने आ रही हैं। जिससे अधर में काम लटक जाता है।
 
तकनीकी खामी से संचालन में दिक्कत
सदर कोतवाली में लगे कंप्यूटर में मुकदमा दर्ज करने के आदेश होने के बाद भी तीन चार  दिन में एफआईआर की फीडिंग हो पाती है। करीब एक माह से कंप्यूटर में एफआईआर फीड (दर्ज) होने के बाद कोतवाल के हस्ताक्षर के स्थान पर गलत प्रिंट आ रहा है। इसकी शिकायत कई मर्तबा हैंड होल्ड कंपनी से की जा चुकी है।

अथगाम का अलग है काम
हथगाम थाना पुलिस पर आईजी का आदेश भी बेअसर हो रहा है। हालात यह हैं कि यहां के कंप्यूटर में न तो साफ्टवेयर एफआईआर फीडिंग अपडेट और न ही ऑपरेटर की व्यवस्था है। इसके अलावा थाने में कोई प्रशिक्षित पुलिस कर्मी भी शायद नहीं है।  
विज्ञापन


इन्हें दिया गया प्रशिक्षण
उपाधीक्षक-3
निरीक्षक/एसआई-63
कांस्टेबिल-203
 

सीसीटीएनएस के फायदे
- देश के सभी थाने एक दूसरे से इंटरकनेक्ट होंगे। ऐसे में किसी भी अपराधी का रिकार्ड कोई भी थाना देख सकेगा।
- आन लाइन एसआईआर होने से पीड़ित को तत्काल रिपोर्ट दर्ज होने की जानकारी मिल जाएगी।
- पास पोर्ट, शस्त्र लाइसेंस सहित अन्य आवेदन आन लाइन किए जा सकेंगे और उसका आन लाइन ही प्रमाणन भी हो जाएगा।
- थानों के रजिस्टर के पन्ने फटने पर भी रिकार्ड सुरक्षित रहेंगे। उन्हें ढूढने में दिक्कत नहीं होगी।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें