सर्दी रिकार्ड बनाने को आतुर है। लुढ़कते पारे से तापमान में आ रही गिरावट से हरेक जीवन सहम गया है। महीने भर के दौरान ठंड से 28 मौतें अब तक हो चुकी हैं। देखा जाए तो ऐसे में मरने वालों का औसत हरेक दिन एक मौत का है। ठंड सेे जिंदगी बेपटरी हो चली है। बाजारों से खरीदार ओझिल हो गए हैं।
प्रशासन का प्रयास शासन स्तर दी जाने वाली आर्थिक सहायता तक सीमित है। गरीबों को ठंड से बचाने के लिए प्रशासन ने दूसरी कंबलों की दूसरी डिमांड भेजी है। जबकि जनप्रतिनिधियों से लेकर ज्यादातर स्वयंसेवी संस्थाओें के कर्ताधर्ता ओझिल नजर आ रहे हैं।
हाड़कपाऊ सर्दी से छुट्टी का मजा किरकिरा हो गया। लोग दोपहर तक घने कोहरे से ढके रहे आसमान और चल रहीं सर्दीली हवाओं से बाहर निकालने से बाज आए। लिहाजा रविवार को सड़कों पर छाने वाली रौनक सड़कों से नदारद रही।
बच्चों को खासकर कमरों में कैद रखा गया। इस दिन ठंड ने पिछले कई दशक के रिकार्ड को हाशिए पर ला दिया। सर्दीली हवाओं के रूक रूक करके चलने से जनजीवन ठहर गया।
कंपकंपाने वाली ठंड के बीच देर सुबह तक घना कोहरा रहने से लोगाें ने घरों से निकलने का इरादा छोड़ दिया। बाहर वहीं निकले, जिन्हें जरूरी था।
यह मौसम का कहर ही था कि जाम से कराहने वाली शहर की सड़कें वाहनों से खाली नजर आई। अलबत्ता मवेशियों का जरूर इन सड़कों और चौराहों पर जमघट दिखाई दिया।
हालात यह रहे कि स्पोर्ट्स स्टेडियम, आईटीआई मैदान, जीआईसी मैदान अन्य दिनों की अपेक्षा खाली खाली नजर आए। गैरबाजारू इलाकों में तो कर्फ्यू जैसा नजर था।
परिवार समेत टीवी के सामने बैठ करके बीच-बीच में मौसम के हालात जानने की कोशिशें होतीं रहीं। कोहरे और ठंड से दलहन की फसल बर्बाद होने के कगार पर पहुंच गई है।
यही हालत रही तो पूरी फसल नष्ट हो जाएगी। छाई बदली और कोहरे से अरहर के फूल झुलस कर झड़ गए, जिससे फलियां नहीं निकल रही हैं। नई फसल में फूल निकलना बंद हो गए हैं। किसान धूप निकलने का इंतजार कर रहे हैं लेकिन धूप भी आंख मिचौली खेल रही है।
किसानों का कहना है इस माह में अरहर की फसल में भरपूर फलियां आ जाती थी लेकिन इस वर्ष 80 फीसदी पौधों के फू ल झड़ जाने से फलियां नहीं लगी हैं। दोबारा फूल आने पर फलियों में दाने कम हो जाते हैं और रोगग्रस्त हो जाते हैं।
अरहर की फसल खराब होने से दाल की कीमतों में कोई गिरावट नहीं आएगी। किसान कृष्णकुमार, रामप्रताप, शिवभवन और प्यारेलाल ने बताया कि कोहरा और ठंड से आधी से अधिक फसल बर्बाद हो गई है।
जैसे-जैसे तापमान नीचे लुढ़क रहा है वैसे-वैसे ही बाजारें भी ठंडी पड़ती जा रही हैं। यह स्थिति गांव कस्बों में सजने वाले बाजार हाट से लेकर शहर की पॉश बाजारों से खरीदार नदारद हैं।
चौक में जनरल स्टोर की दुकान चलाने वाले गुड्डू कहते हैं कि दो दिन में हजार रुपए की भी दुकानदारी नहीं हुई है। जबकि इससे पहले हरेक दिन कम से कम पांच हजार रुपये की दुकानदारी सर्दी में होती रही है।
यहीं पर कपड़ा कारोबारी संजय रस्तोगी ने बताया कि बाजार में इधर दो दिन से बिल्कुल जान नहीं है। मौसम के जो मिजाज नजर आ रहे हैं उससे कम से कम सप्ताह भर ग्राहकों की राह देखनी पड़ेगी।
इनसेट
एक नजर में अब तक प्रशासनिक मदद
- बिंदकी तहसील के 1080 गरीबों को कंबल दिए गए हैं। प्रशासन ने तीन हजार कंबलों की डिमांड भेजी ह्रै।
- खागा तहसील क्षेत्र मेें 1080 कंबल वितरित किए गए हैं। यहां पर भी तीन हजार कंबल और मांगे गए हैं।
- सदर तहसील में 1081 कंबल वितरित किए जा चुके हैं। यहां के लिए 2200 कंबलों की डिमांड की गई हैं।