सर्दी अब प्रकोप बनकर बरस रही है। गलन भरी ठंड सेे हर कोई हलाकान है। पखवारेभर के भीतर ठंड से 16 लोगों की जान जा चुकी है। हालात यह है कि कुछ देर के लिए निकलती धूप भी लोगों को राहत नहीं दे पा रही है।
रविवार को भी दोपहर तेज धूप निकली, लेकिन इसकी तासीर नदारद थी। गलन के आगे तपिश का अता पता नहीं था। धूप निकलने के बावजूद लोग गरम कपड़ों से लिपटे नजर आए।
यातायात भी बेपटरी है। ट्रेनों से लेकर बसों तक की रफ्तार में ब्रेक लग गया है। कोहरे के कारण लंबी दूरी की ट्रेनें घंटों विलंब से चल रही हैं। मौसम की मार से सबसे ज्यादा गरीब तबके पर है। दिहाड़ी पर काम करके रोजी रोटी चलाने वाले मजदूरों के सामने जबरदस्त संकट है।
उधर, कोहरे की मार से गेहूं को छोड़ कर ज्यादातर फसलें बर्बाद हो रही है।ठंड से 14 दिसंबर को अमौली पीएचसी के दपसौरा गांव के जागेश्वर प्रसाद की मौत हो गई थी।
18 दिसंबर को हुसैनगंज सीएचसी के मकनपुर के राम करन पुत्र राम दास ने ठंड लगने से दम तोड़ दिया। 19 दिसंबर को बिंदकी सीएचसी के हजरतपुर के संतोष कुमार व कजियाना मोहल्ला के बारी हसन की ठंड से मौत हो गई। इसी दिन खजुहा के गांव खूंटाझाल के सभाजीत की पत्नी सुमन की मौत हो गई।
20 दिसंबर को हंसवा पीएचसी के जयचंदपुर गांव प्रेमचंद्र की 10 साल की बेटी पूजा का दम निकल गया। 21 दिसंबर को हुसैनगंज सीएचसी के चौहट्टा गांव के जागेश्वर प्रसाद व औढ़ेरवा निवासी मुन्ना शर्मा की मौत हो गई।
इसी तारीख में बिंदकी सीएचसी के चूरामनखेड़ा निवासी मुलायम सिंह की तीन महीने की बेटी की ठंड ने दुनिया देखने से पहले ही जिंदगी छीन ली। 23 दिसंबर को चार मौतें हुईं।
पूर्वी बाईपास में बेहोशी की हालत में 21 दिसंबर को मिले अज्ञात व्यक्ति ने सदर अस्पताल में दम तोड़ दिया। इसके अलावा गोपालगंज पीएचसी के बरौरा गांव के धर्मराज की पत्नी उर्मिला, खजुहा पीएचसी के कटरा नरैचा निवासी पांच साल के लड़के रामजी व खखरेरू सीएचसी के राईपुर गांव के भोक्कन पासवान की ठंड से मौत हो गई।
27 दिसंबर को गोधरौली के बहादुर केवट, खजुहा पीएचसी के बहरौली गांव के रामकुमार व हुसैनगंज सीएचसी के पतहा गांव की सूरतीदेवी ठंड से जिंदगी हार गईं।
तिलहन व दलहन की फसलें बर्बाद
जिस प्रकार से मौसम नजर आ रहा है उससे किसान ऊहापोह में दिखाई देने लगा है। तेज और देर तक कोहरा पड़ने से फूल वाली फसलों की शामत आ गई हैं। तिलहन व दलहन बर्बाद हो रही है।
केवल गेहूं की फसल ऐसी है जिसे बोने वाला किसान मौसम से बेपरवाह है। शेष किसानों की मौसम के उतार चढ़ाव पर निगाहें टिकीं हैं। बिंदकी तहसील क्षेत्र के कोरसम गांव के काश्तकार कर्णवीर सिंह परिहार का कहना है कि मौसम की इस मार से आलू और केला की फसलें भी प्रभावित हो रहीं हैं।
रोजी-रोटी पर भी मौसम की काली छाया
मौसम की मार से मेहनत मजदूरी करके रोज कमाने और खाने वाले तबके को दो राहे पर ला दिया है। मांगने से भी काम नहीं मिल पा रहा है। जिससे कामगार तबके को रोजी और रोटी के लिए भटकना पड़ रहा है।
पीएचसी मोड़ में हरेक सुबह काम की तलाश में लगने वाली कामगारों की फौज में मौजूद गाजीपुर के अशोक कुमार ने बताया कि ठंड में काम नहीं मिल रहा है। वह दो दिन से लौट रहा है। यदि कुछ दिन और ऐसा रहा तो दो जून की रोटी के लाले पड़ जाएंगें।
अलाव के नाम पर की जा रही खानापूरी
जिले में जल रहे सरकारी अलाव की आंच भले न महसूस हो रही हो लेकिन प्रशासनिक स्तर से जरूर दावे हो रहे हैं, लापरवाही का आलम ही कहेंगे कि सूखी के बजाय गीली लकड़ियां जलाने को दी जा रही हैं।
ऐसे में राहगीरों के लिए इलाकाई मददगार बन रहे हैं। सादीपुर चौराहा में एक दिन पहले डाली गई अलाव के लिए महुआ की ताजी लकड़ी डालने से इलाकाई को अलाव की आंच के लिए लकड़ी की टाल पर 100 रुपये खर्च करने पड़े।