सीएमओ और सीएमएस साहब! यह सरकारी अस्पताल ही गरीबों का सहारा है। इनके हाथ में प्राइवेट एक्सरे, अल्ट्रासाउंड यह सब क्या है? इतना बजट मिल रहा, डॉक्टर हैं, मशीनें हैं, फिर भी जनता इतनी परेशान दिख रही? बाहरी लोगों को जनता डॉक्टर समझ रही। अब बहुत हो गया, सुधर जाओ।
जो दलाल दिख रहे हैं, अब नहीं दिखने चाहिए। कोतवाल इन दलालों पर ऐसी दफा लगाओ कि दोबारा दलाली करना भूल जाएं। यह अल्फाज किसी नाटक के नहीं बल्कि प्रदेश के चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्यमंत्री सुधीर रावत के हैं। वह शुक्रवार को जिला अस्पताल का औचक निरीक्षण करने पहुंचे थे।
उन्होंने सदर अस्पताल की इमरजेंसी, स्टाफ रूम, रेडियोलाजी विभाग, पैथालाजी विभाग, पुरुष व महिला वार्ड का निरीक्षण किया। महिला वार्ड के बाहर पड़ी चेयर पर बैठे बेंती गांव के मेवालाल के हाथ में प्राइवेट सिटी स्कैन सेंटर का अल्ट्रासाउंड व टेसाही के छोट्टन के हाथ में इसी सेंटर का एक्सरे दिखा।
बाहरी एक्सरे व अल्ट्रासाउंड देख कर सीएमएस डॉ. एके मिश्रा को निशाने पर लिया। महिला वार्ड में भर्ती उर्मिला से मिले। महिला मरीज ने बताया कि डॉक्टर नहीं आए हैं। जबकि बीएचटी की पड़ताल में इस महिला मरीज को फिजीशियन डॉ. आरएम गुप्ता देख चुके थे। बीएचटी में फिजीशियन के हस्ताक्षर पाए जाने पर सीएमएस को चेतावनी दी।
महिला अस्पताल के निरीक्षण में लेबर रूम में गंदगी दिखी। यहां चीफ फार्मासिस्ट अरुणेश कुमार एक मरीज के पास बैठे थे। पूछने पर महिला ने बताया कि यही तो डॉक्टर साहब हैं, जो इलाज कर रहे हैं। तीमारदारों के हाथ में पटेल निदान केंद्र की रिपोर्ट देख राज्यमंत्री ने महिला सीएमएस डॉ. रेखारानी को कड़ी चेतावनी दी।
सीएमएस से उनका कार्यकाल पूछा। चार साल बताने पर बोले कि आपको इतने समय में नहीं दिखा जो हमें कुछ ही देर में दिख गया। इस मौके पर सीएमओ डॉ. विनय कुमार पांडेय व एसीएमओ डॉ. एलआर सचान भी बंगले झांकते दिखे।
स्वास्थ्य राज्यमंत्री ने पीएचसी व सीएचसी की दशा सुधारने के लिए सीएमओ को उनकी जवाबदेही याद दिलाई। कहा कि पीएचसी व सीएचसी में इलाज नहीं होता।
अगर हो रहा होता तो दूर दराज से जनता सदर अस्पताल न भाग कर आती। उन्होंने 24 घंटे इमरजेंसी सेवाएं उपलब्ध कराने के निर्देश देने के साथ ही फर्जी नर्सिंगहोम बंद कराने के लिए अभियान चलाने को निर्देशित किया। कहा कि अगली बार वह आए तो एक भी फर्जी नर्सिंगहोम संचालित होते मिला तो खैर नहीं।