दो-तीन दिन से हो रही बूंदाबांदी ने संक्रामक रोगों को हवा दे दी है। अकेले जिला अस्पताल में पिछले दो दिन से डायरिया, बुखार, पेट दर्द व त्वचा संबंधी रोगों से ग्रसित मरीजों की संख्या आम दिनों की अपेक्षा दोगुनी रही। बरसात में सिर उठाने वाली संक्रामक बीमारियां की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग के संक्रामक सेल ने खुद कमर कस ली है। जबकि इन बीमारियों के फैलने के कारणों से पार पाने की प्रशासन स्तर से पहल नाकाफी है। साफ-सफाई में हो रहा विलंब संक्रामक रोग को हवा देने का काम कर रहे हैं।
पिछले बुखार के साथ उल्टी दस्त के रोगियों में इजाफा होने लगा है। सरकारी व गैर सरकारी अस्पतालों में सबसे ज्यादा रोगी पेट की बीमारी लेकर पहुंच रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि बदलते मौसम में ऊलजलूल खानपान से बचा जाए, ताकि तबियत ठीक रहे। गंदगी व जलभराव से भी बीमारियां पनप रही हैं। सदर अस्पताल में रोजाना करीब सात से आठ सौ मरीजों में साठ फीसदी संख्या उल्टी-दस्त व बुखार के रोगियों की है। इनमें से पचास फीसदी से ज्यादा लोग ग्रामीणांचल से इलाज कराने को आ रहे हैं। पैथालाजी मेें होने वाली जांचों में सबसे ज्यादा लीवर से संबंधित जांचे शामिल हैं। शुक्रवार को पेट संबंधी कुल सवा तीन सौ जांचें हुईं।
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सूचना हासिल करने को फोन तक नहीं
डिस्ट्रिक संक्रामक सेल के दफ्तर में कई साल से बेसिक फोन तक की सुविधा नहीं है। ऐसे में संक्रामक रोग फैलने की सूचना स्वास्थ्य अधिकारियों के मोबाइल नंबरों पर सबसे पहले पहुंचती है। तब जाकर अधिकारियों के जरिए सेल को फलां गांव में संक्रामक रोग फैलने की बात पता चलती है। एक चिकित्साधिकारी का कहना है कि कई बार तो सेल को मीडिया के जरिए जानकारी मिल पाती है। जिसके बाद सेल कदम उठाती है।
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जरूरत पर मिलाएं 9453493651
स्वास्थ्य विभाग ने संक्रामक सेल की तीन टीमें गठित की हैं। इनमें से पहली टीम में चिकित्साधिकारी डॉ. आफाक अहमद, स्वास्थ्य पर्यवेक्षक सूर्यपाल मौर्या व फाइलेरिया कर्मी उमाकांत शामिल है। दूसरी टीम में चिकित्साधिकारी डॉ. एसके श्रीवास्तव, स्वास्थ्य पर्यवेक्षक धर्मेंद्र तिवारी व फाइलेरिया कर्मी छत्रपाल व तीसरी टीम में चिकित्साधिकारी डॉ. आरपी जाटव, स्वास्थ्य पर्यवेक्षक शांती स्वरूप व फाइलेरिया कर्मी प्रमोद तिवारी शामिल हैं। आठ-आठ घंटे की इस जिम्मेदारी को उठाने वाली इन टीमोें में तीसरी टीम की सेवा चिकित्साधिकारी डॉ. जाटव के मोबाइल नंबर 9453493651 कॉल पर ही ली जा सकती है।
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रैपिड रिस्पांस टीम एलर्ट हैं। संक्रामक सेल के पास दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता है। जीवन रक्षक दवाओं में हार्ट अटैक के रोगियों को दी जाने वाली टर्मिन व मैफेटिंंन जैसे इंजेक्शन उपलब्ध हैं। किसी भी स्थिति में पूरा प्रयास है कि मरीजों को परेशान न होना पड़ा और जरूरत पर इलाज मुहैया हो सके। - डॉ. रमाकांत, नोडल अधिकारी, संक्रामक सेल।
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संक्रामक रोगियों की भीड़ बढ़ने की स्थित से निपटने के लिए जिला व महिला अस्पताल में अतिरिक्त बेड के प्रबंध कर लिए गए है। बदलते मौसम में सेहत के प्रति लापरवाही ठीक नहीं है। कटे फटे फल, बासी भोजन, चाट आदि के सेवन से बचा जाना चाहिए। हो सके तो पानी उबाल करके पीया जाए।- डॉ. एके मिश्रा, सीएमएस, सदर अस्पताल।