मंजिलें उनको मिलती जिनके सपनों में जान होती है, पंखों से कुछ नहीं होता हौसलों में उड़ान होती है। जी हां यह पंक्तियां कक्षा सात के होनहार छात्र मोहम्मद हेशाम पर बिल्कुल सटीक बैठती हैं। अपनी काबलियत और मेहनत के दम पर 11वीं साल की उम्र में ही पुराने खिलौनों, साइकिल के रिम, मोबाइल की बैटरी और प्लाई आदि के सहयोग से उसने रिमोट से चलती क्रेन बना डाली। होनहार बालक के इस कारनामे को देख सभी दांतों तले उंगलियां दबा लेते हैं।
शहर के शादीपुर नाका इस्माइलगंज में रहने वाले नईम खान और मुन्नवर जहां के पुत्र मोहम्मद हेशाम में गजब का टैलेंट हैं। चिल्ड्रेन पब्लिक स्कूल में क क्षा सात में पढ़ने वाले हेशाम ने रिमोट से चलने वाली क्रेन बनाई है। यह क्रेन प्लाई, बाइक के इंजन की चैन, पुराने शाकर, मोबाइल की बैटरी, खिलौनों के पुर्जे से बनाई गई है। इसके साथ ही पेन पेंसिल वाले बाक्स से रिमोट तैयार किया गया है। इस क्रेन में लाइट भी लगी है। और 250 ग्राम तक वजन उठाने की क्षमता है। मोहम्मद हेशाम ने बताया कि इसे बनाने में ढाई महीने कर समय लगा है। कहा कि वह बड़े होकर डा.एपीजे अब्दुल कलाम, सर सी वी रमन,े विक्रम साराभाई, वेंकटरामन रामकृष्णन जैसे वैज्ञानिक बनना चाहते हैं जिन्होंने एक से बढ़कर एक शानदार अविष्कार किया। हेशाम ने बताया कि इससे पहले उसने ट्रेन बनाई। अब मैग्नेट से चलने वाली ट्रेन बनाने का लक्ष्य है। हेशाम के इस कारनामे पर जनता दल यूनाइटेड के युवा जिलाध्यक्ष मोहम्मद आसिफ ने खुशी जताई और कहा कि हेशाम को पुरस्कृत किया जाएगा। ऐसे ही होनहार बच्चे आगे चलकर देश का नाम रोशन करेंगे।
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होनहार छात्र ने ऐसे अविष्कार करके न सिर्फ माता पिता व स्कूल का नाम रोशन किया है बल्कि जिले को गौरवान्वित किया है। ऐसे बच्चों को समय समय पर कालेज प्रबंधतंत्र सम्मानित करता है। मोहम्मद हेशाम द्वारा बनाए गए प्रोजेक्ट के आधार पर उसे सम्मानित किया जाएगा। - मिसेज यंग, प्रिसिंपल चिल्ड्रेन पब्लिक स्कूल