हेलमेट की अहमियत तो उनसे पूछो जिनकी जिंदगी हेलमेट
ने बचाई। हेलमेट आपकी जान जोखिम में पड़ने से कैसे बचाता है। यह बात शहर के
एक युवा को माह भर पहले समझ में आया। हादसे में हेलमेट के चीथड़े उड़ गए,
लेकिन उसकी जान सही सलामत बच गई। कुछ ऐसे जागरूक युवा भी हैं, जो बिना
हेलमेट लगाए बाइक में बैठते भी नहीं है। यह लोग असल में जागरूकता के प्रहरी
है। वैसे हेलमेट मजबूरी नहीं जरूरी है। यात्रा चाहे छोटी हो या बड़ी
हेलमेट जरूर लगाना चाहिए। बाइक चलाते समय हेलमेट पहनने में भले ही लोग
दिलचस्पी नहीं ले रहे हो लेकिन हादसे के दौरान जिनकी हेलमेट ने जान बचाई है
वह इसकी उपयोगिता को भलीभांति जानते हैं। तभी तो बाइक पर बैठने से पहले
हेलमेट साथ लेना नहीं भूलते है। ऐसे ही अनुभव से दो-चार हुए लोगों ने अपने
विचार साझा किए।
मां ने हेलमेट देकर बचाई थी बेटे की जान
फतेहपुर।
शहर के खलील नगर निवासी दानिश अपने पिता जुबैर के साथ बाइक से सरसौल गए
थे। सरसौल में रहने वाले रिश्तेदार की मौत हो गई थी। इसी वजह से उन्हें
जल्दबाजी में बाइक से जाना पड़ा था। वह वहां से लौटते समय कुंवरपुर मोड़ के
पास एक साइकिल सवार को बचाने में डिवाइडर से टकरा गए थे। हेलमेट की पर्त
के चीथड़े उड़ गए थे और दानिश को चोटें भी आई थीं, लेकिन उसकी जान बच गई
थी। दानिश ने बताया कि वह कभी भी हेलमेट नहीं लगाता था। लेकिन उस दिन घर से
निकलते समय उसे मां ने हेलमेट दे दिया था। उसने भी धूल से बचने और जल्दी
पहुंचने की वजह से हेलमेट पहन लिया था।
हेलमेट लगा करते हैं सुरक्षित महसूस
फतेहपुर।
हुसैनगंज थाना क्षेत्र के अग्रिहोत्री का पुरवा निवासी राहुल (20) कभी भी
हेलमेट लगाना नहीं भूलते हैं। राहुल ने बताया कि उसने एक साल पहले
ड्राइविंग लाइसेंस बनवाया था। इसके बाद बाइक चलाना शुरू किया। बाइक चलाने
के पहले दिन से आज तक हेलमेट लगाना कभी नहीं भूला है। कई बार बाइक फिसलने
से गिरा, लेकिन उसे गंभीर चोट कभी नहीं आई है। हेलमेट लगाने के बाद
सुरक्षित महसूस होता है।