घटनास्थल पर पड़ी बाइक सवार की चप्पल।
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फतेहपुर। शहर की 50 नंबर रेलवे क्रासिंग से बाइक निकालने के लिए बोल्डर का सहारा लिया जाता है। ट्रैक किनारे पड़े बोल्डर लोहे की पटरी से जोड़कर रखने के बाद उसे बाइक निकालते हैं। रविवार भी ऐसा ही प्रयास एक बाइक सवार कर रहा था। वह सफल होता इससे पहले नान स्टापेज स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एक्सप्रेस आ गई और बाइक इंजन में फंस गई।
बंद रेलवे क्र ांसिंग पार करना जुर्म है। उसी तरह रेलवे के खुले ट्रैक को भी किसी भी तरीके से पार करना जुर्म है। ऐसा करने पर सजा का प्रावधान भी है। इसके बावजूद न तो लोगों में सजा का खौफ है और न ही अनमोल जिंदगी को दांव पर लगने से बचाने का। साइकिल सवार जहां कंधे पर साइकिल टांग कर इस पार से उस पार होते हैं तो बाइक और स्कूटी सवार रेलवे ट्रैक के इर्द गिर्द पड़े बोल्डरों को जरिए वाहन निकालते हैं। इस प्रयास में कई बार बड़े हादसे बच चुके हैं। इसके बावजूद लोग अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे हैं। अभी साल भर पहले एक युवक बाइक निकालते वक्त मालगाड़ी की चपेट में आने से बचा था। गनीमत रही कि पीछे से आ रहे अन्य लोगों ने धक्का देकर बाइक को गैस गोदाम रोड की ओर पहुंचाने मेें मदद कर दी वरना युवक के साथ कुछ भी हो सकता था। रविवार की घटना के प्रत्यक्षदर्शी जयरामनगर के राजू ने बताया कि जिस वक्त हादसा हुआ वह ट्रैक से कुछ दूरी पर खड़े दोस्त से बात कर रहे थे। उन्होंने देखा कि कई लोग पैदल आरपार हो रहे थे। जयरामनगर साइड से एक युवक बाइक लेकर आया। उसने बाइक ट्रैक के किनारे खड़ी की और बोल्डर डालकर जैसे ही बाइक पार करना चाही, इलाहाबाद की ओर से आ रही ट्रेन की रफ्तार देखकर उसका हौसला जवाब दे गया। बचने के चक्कर में उसकी एक चप्पल ट्रैक में ही फंस गई। जितने भी लोग इस नजारे के गवाह थे, उनकी निगाह इंजन में फंसकर साथ खिंचती गई बाइक पर लग गई। इसी बीच बाइक पार करने का प्रयास करने वाला शख्स मौके से भाग खड़ा हुआ।
आवाज सुन दहल गया दिल
फतेहपुर। दिल्ली-हावड़ा रूट पर दौड़ रही नान स्टापेज स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एक्सप्रेस में सवार मुसाफिर आवाज सुनकर दहल गए। दिल्ली जाने के लिए इंजन के बाद तीसरे कूपे में सवार राजन ने बताया कि क्रासिंग पर पहुंचते ही ट्रेन से किसी चीज के जोर से टकराने का अहसास हुआ। उसने खिड़की से झांक कर देखा जो इंजन पर बाइक फंसी थी। यह देखते ही उसका दिल तेजी से धड़कने लगा। राहत तब मिली जब चालक ने ट्रेन रोक दी। इसी कूपे में सवार होकर कानपुर जा रहे इलाहाबाद के दिलशाद ने कहा जिस वक्त बाइक फंसी, ट्रेन में अजब सा कंपन हुआ। हालांकि यह अहसास नहीं कर पाए कि इंजन में कुछ फंस गया है। शहर सीमा के बाहर ट्रेन रुकी तो दिल धक्क कर गया। उन्होंने कूपे से बाहर आकर देखा तो लोग इंजन की ओर भाग रहे थे।
छह सौ मीटर खिंचती चली गई बाइक
फतेहपुर। शहर के पचास नंबर की बंद रेलवे क्रासिंग पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एक्सप्रेस में फंसी बाइक छह सौ मीटर तक खिंचती चली गई। चालक ने समय रहते ट्रेन रोक दी, वरना कुछ भी हो सकता था। प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो जिस वक्त ट्रेन के इंजन में बाइक फंसी, तेज आवाज हुई। यह आवाज दूर तक सुनी गई। आसपास के लोग घरों से बाहर निकल आए। लोग जब तक कुछ सोच समझ पाते ट्रेन के इंजन में फंसी बाइक ऋतुराज महाविद्यालय तक खिंचती चली गई।