शनिवार को बैंकों में छुट्टी के चलते लोगों को कैश के लिए परेशान होना पड़ा। ग्राहक एटीएम के भरोसे नोट निकालने पहुंचे पर अधिकांश बंद रहने से निराशा ही हाथ लगी।
नोट बंदी के बाद से लगातार कैश की समस्या बनी हुई है। महीने के चौथे शनिवार को बैंकों में छुट्टी रही। बाजार का दिन होने के बाद कैश का संकट होने से बिक्री पर भी असर दिखा। शनिवार को यूनियन बैंक वर्मा चौराहा का शटर बंद रहा जिससे वहां पहुंचे ग्राहक निराश होकर लौट गए। इसी प्रकार आईसीआईसीआई बैंक पीलू तले का एटीएम खुला रहा लेकिन कैश खत्म होने से नोट नहीं निकले। स्टेट बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, बैंक आफ बड़ौदा, आईडीबीआई बैंकों के एटीएम बंद रहे। लोग एटीएम कार्ड लिए भटकते नजर आए।
विज्ञापन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जहां कैशलेस व्यवस्था को प्रभावी करने के लिए जोर दे रहे हैं वहीं इसका जिले में असर कम ही नजर आ रहा है। रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड में अभी तक स्वाइप मशीन नहीं लगाई गई। इससे यात्रियों को कैश लेस सुविधा का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
प्रधानमंत्री के पांच सौ और एक हजार रुपये की नोट बंदी के बाद से लोगों को कैश के लिए भटकने का सिलसिला अभी थमा नहीं है। जिले के चुनिंदा माल व बड़े प्रतिष्ठानों में ही अभी स्वाइप मशीनें लगी हैं। ज्यादातर नर्सिंग होम में कैश लेस व्यवस्था नहीं शुरू की गई है। ऐसे में तीमारदारों को इलाज के लिए कैश का इंतजाम करना पड़ रहा है। रेलवे स्टेशन और बस स्टैड में भी स्वाइप मशीनें नहीं लगी हैं। इसके अलावा पेटीएम की सेवा तो एक दो दुकानों में ही है। अधिकांश दुकानों में उपभोक्ताओं को कैश से ही खरीददारी करनी पड़ती है।