धाता। प्रसिद्धपुर से मखौवा तक यमुना तटवर्ती गांवों को जोड़ने वाला करीब पांच किलोमीटर लंबा मुख्य मार्ग बदहाली का शिकार हो चुका है। सड़क पर डामर और गिट्टी का नामोनिशान नहीं बचा है। गड्ढों और उड़ती धूल के बीच दोपहिया वाहनों से गुजरना जोखिम भरा हो गया है। इस मार्ग से सैदपुर, सलेमपुर, रानीपुर, मोदापुर, मखौवा, छोटा मखौवा, तुलसीपुर, ऐरयी, सेमरी समेत लगभग 24 गांव जुड़े हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि यह मार्ग क्षेत्र के लिए बेहद अहम है। इसी रास्ते से लोग स्कूल, इंटर कॉलेज, उच्च शिक्षण संस्थान, बैंक और बाजारों तक पहुंचते हैं। चित्रकूट, राजापुर और मध्यप्रदेश की ओर जाने के लिए भी यही मुख्य मार्ग है। प्रतिदिन सैकड़ों छात्र-छात्राएं इसी रास्ते से आवागमन करते हैं, लेकिन जर्जर सड़क के कारण उन्हें भारी परेशानी झेलनी पड़ती है।
बारिश के मौसम में सड़क की हालत और खराब हो जाती है। इससे फिसलने और दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। यह मार्ग यमुना नदी के बालू खनन से जुड़े रानीपुर प्रथम, ऐरयी प्रथम, ऐरयी द्वितीय, रानीपुर दामपुर और सलेमपुर जैसे कई घाटों को भी जोड़ता है।
इसके बावजूद करीब 10 वर्षों से सड़क जर्जर पड़ी है। ग्रामीणों का आरोप है कि जनप्रतिनिधियों और प्रशासन को कई बार अवगत कराने के बाद भी केवल आश्वासन ही मिले हैं।
स्थानीय ग्रामीण अजय सिंह, नंदलाल, हीरालाल मास्टर, संतलाल, ननकान निषाद, रवींद्र सिंह, मुंशी तिवारी, बनवारी लाल और राकेश सिंह का कहना है कि खराब सड़क के कारण मरीजों को अस्पताल ले जाने में दिक्कत होती है। कई बार एंबुलेंस रास्ते में फंस जाती है। व्यापारियों और किसानों को भी उत्पाद बाजार तक पहुंचाने में अतिरिक्त समय और खर्च उठाना पड़ रहा है।
लोकनिर्माण विभाग के एक्सईएन एके सील ने बताया कि ग्रामीण सड़कों के निर्माण के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। बजट मिलने के बाद निर्माण कार्य कराया जाएगा।
फोटो-29-प्रसिद्धपुर-मखौवा जर्जर संपर्क मार्ग। संवाद