फोटो-2-भैसौली में खजूर का कूंचा बनाती चांद बानो। स्रोत स्वयं
फतेहपुर। तेलियानी ब्लॉक के भैसौली गांव की नेहा बेगम ने ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़कर पुश्तैनी व्यवसाय खजूर के कूंचे (कूंचा) को नई पहचान दिलाई है। स्वयं सहायता समूह से मिले सहयोग और प्रशिक्षण के बल पर कूंचे न सिर्फ जिले में बल्कि कानपुर और प्रयागराज की मंडियों तक पहुंच रहे हैं। इससे वह आर्थिक रूप से सशक्त होने के साथ अन्य महिलाओं के लिए भी रोजगार का माध्यम बनी हैं।
नेहा बेगम वर्ष 2016 में ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत भोलेनाथ महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं। समूह के माध्यम से उन्होंने बचत, ऋण और स्वरोजगार की जानकारी हासिल की और गांव की महिलाओं को संगठित करना शुरू किया।
वर्ष 2025 में चांद बानो, रिजवाना और बेबी के साथ मिलकर उन्होंने खजूर के कूंचे के पुश्तैनी कार्य को व्यवसाय का रूप दिया। इसके लिए ग्रामीण आजीविका मिशन से 50 हजार रुपये का ऋण लिया। इसे समय पर चुकाकर उन्होंने विश्वसनीयता भी साबित की।
कूंचा निर्माण के लिए नेहा महोबा से कच्चा माल मंगाती हैं। एक बार में 70 से 80 गांठ खजूर आती हैं। इनसे तैयार कूंचे बाजार में भेजे जाते हैं। इस कार्य में उनके परिवार का भी पूरा सहयोग रहता है। भाई और अन्य परिजन तैयार माल को जिले की मंडियों के साथ कानपुर और प्रयागराज तक पहुंचाते हैं।
नेहा परिवार की जरूरतें पूरी करने के साथ-साथ समूह से जुड़ी महिलाओं को भी स्वरोजगार के लिए प्रेरित कर रही हैं। समय निकालकर वह गांव की महिलाओं को समूह से जुड़ने, बचत करने और अपने हुनर को आजीविका का साधन बनाने की सीख देती हैं।
फोटो-2-भैसौली में खजूर का कूंचा बनाती चांद बानो। स्रोत स्वयं