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Fatehpur News: पुलिस और सफेदपोश के संरक्षण में दुस्साहसिक हुआ अक्कू

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फतेहपुर। पत्रकार दिलीप सैनी हत्याकांड में मुख्य आरोपी आलोक तिवारी उर्फ अक्कू समेत नामजद चार आरोपियों का पुलिस सुराग लगाने में नाकाम है। उसके अवैध कामों में पुलिस व सफेदपोश भी हिस्सेदार रहे। कोतवाली, बाकरगंज पुलिस चौकी के पूर्व के सीसीटीवी फुटेज निकाले जाएं तो यह स्थिति साफ हो जाएगी। यही वजह थी कि पत्रकार की हत्या से पहले नर्सिंग होम संचालक को दी धमकी में अक्कू तिवारी बोला था कि पुलिस उसका कुछ नहीं कर सकती है।
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सदर कोतवाली क्षेत्र बिसौली गांव स्थित यार्ड के आवास में एक समाचार एजेंसी के पत्रकार दिलीप सैनी की 30 अक्तूबर की रात चाकू व सरिया से गोदकर हत्या कर दी गई थी। बीच-बचाव में दिलीप का साथी भाजपा नेता शाहिद घायल हुआ था। कानपुर रीजेंसी से इलाज के बाद शाहिद घर लौट आया है। पुलिस मामले में नामजद अंकित तिवारी, विपिन शर्मा, बबलू उर्फ जितेंद्र, चिक्कन उर्फ आशीष कुमार, लेखपाल सुनील राणा को जेल भेज चुकी है। मुख्य आरोपी आलोक तिवारी उर्फ अक्कू अपने भाई अनुराग उर्फ अन्नू तिवारी व साथियों जांटी उर्फ अफजल, सुभाष पांडेय संग फरार हैं।
पुलिस मध्य प्रदेश, कानपुर, कौशांबी, प्रयागराज आरोपियों की तलाश में रवाना हुई है। यहां उनके नजदीकियों के ठिकानों पर दबिश दे रही है। बताया जाता है कि अक्कू तिवारी अवैध टेंपो स्टैंड का संचालक है। टेंपो स्टैंड पुलिस की मिलीभगत से चलवाता रहा है। इलाके के बड़े व छोटे मामले भी उसके माध्यम से ही पुलिस हल करती थी। जुआं जैसे अवैध कामों के मुनाफे में पुलिस कर्मियों को हिस्सेदार बनाता था। इसी वजह से पुलिस का करीबी बना रहता था। जमीन कब्जे जैसे काम एक सफेदपोश के लिए करता था। बदले में उसे संरक्षण मिलता था। नर्सिंग होम में विवाद के बाद संचालक प्रकाश को दी धमकी में उसने पुलिस को खूब धोया है। सीओ सिटी सुशील दुबे ने बताया कि आरोपी की तलाश में दबिश दी जा रही हैं। जल्द ही आरोपियों को पकड़ा जाएगा और सारे राज बाहर आएंगे।
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तीन साल बाद बरामद बंदूक विवादित भूमि से जुड़ी
- एक नेता के इशारे पर जमीन के हिस्सेदार पर लिखा था मुकदमा
- पत्रकार की पैरवी पर भूमि से नेता को हाथ खींचना पड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी
फतेहपुर। पत्रकार हत्याकांड के पीछे वीआईपी रोड की विवादित जमीन का मामला सुर्खियों पर छाया है। प्रकरण में कोतवाली पुलिस की भूमिका भी संदिग्ध है। पुलिस ने एक नेता के इशारे पर हिस्सेदार को ही चोरी में जेल भेज दिया था। अचानक तीन साल से चोरी की बंदूक एक माह बाद पुलिस के हाथ लगी और उसे चुपचाप लावारिस में दाखिल कर मुकदमे को खत्म किया गया।
वीआईपी रोड की करोड़ों की भूमि पर हिस्सेदारों के बीच विवाद चला आ रहा है। एक हिस्सेदार का खतौनी में नाम के बाद भी उसे हिस्सा नहीं मिल पा रहा था। बाकी हिस्सेदारों की जमीन की सफेदपोश के करीबियों के नाम पर लिखा-पढ़ी हुई। बचे हिस्से वाले व्यक्ति ने भूमि बिक्री पर पत्रकार दिलीप सैनी की पैरवी पर आपत्ति लगाई थी। उसने बैनामा व वसीयत के तहत भूमि बिक्री खारिज करने का मुकदमा भी कोर्ट में डाला। इस विवाद को निपटाने के लिए एक नेता के इशारे पर साजिश के तहत चोरी का तीन साल पहले कोतवाली पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया था। पुलिस ने आठ माह पहले उसे जेल भी भेज दिया था। साजिश के तहत चोरी की बंदूक एक माह पहले पुलिस ने बरामद की। बरामद बंदूक भी विवादित भूमि की जगह से मिली थी। मामले में दुबई में रहने वाला एक व्यक्ति भी शामिल है। इस तरह पत्रकार भूमि विवाद पर भी रसूखदारों के निशाने पर था।
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