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कुटाई से निकला 50 ट्रक चावल अमान्य

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फतेहपुर। मानकों पर खरा न उतरने की वजह से भारतीय खाद्य निगम(एफसीआई) के गोदामों पर पहुंचे सीएमआर (कुटाई से निकले चावल) को अमान्य कर दिया गया। एक सप्ताह में एफसीआई के गोदामों में भेजा गया करीब 50 ट्रक चावल जांच के बाद अमान्य हुआ है। ऐसे में क्रय एजेंसियों व राइस मिल वालों की परेशानी बढ़ गई है। भंडारण व्यवस्था न होने से राइस मिल वालों ने किसानों व क्रय एजेंसियों से धान लेना फिलहाल रोक दिया है। ऐसे में धान खरीद लक्ष्य पूरा करना जिले में चुनौती बन सकता है।
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क्रय केंद्रों में धान खरीद के बाद उसे राइस मिलों में कुटवाया जाता है। इसके बाद निकलने वाले चावल को एफसीआई के गोदामों पर भंडारण के लिए भेजा जाता है। गोदामों पर जाने वाला सीएमआर (कुटाई से निकला चावल) एफसीआई के मानकों पर खरा नहीं उतर रहा। लिहाजा अब तक बाईपास, राधा नगर और जहानाबाद गोदाम से आया 50 ट्रक चावल अमान्य किया जा चुका है। एफसीआई अधिकारियों के अनुसार चावल में वाटर
डैमेज (चावल का एक तय मानक) की मात्रा अधिक होने पर रिजेक्ट किया जा रहा है। वहीं विपणन विभाग के अधिकारियों व राइस मिल वालों का कहना है कि एफसीआई ने चावल की गुणवत्ता नापने में कुछ ज्यादा सख्ती अपना रखी है। पिछैती बारिश की वजह से कुछ किसानों के धान की फसल प्रभावित हुई थी, लेकिन किसानों को
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समर्थन मूल्य का लाभ देने के लिए धान की खरीद कर ली गई है। एफसीआई के अधिकारी सभी बोरों से चावल एकत्रित कर जांच करने की बजाय ट्रक पर लदे कुछ बोरों से ही चावल निकालकर उसकी जांच कर उसे पूरा मान लेते हैं। नियम है कि चावल अमान्य होने के बाद उसकी दोबारा जांच की जाए। इसमें विपणन, राइस मिल व
एफसीआई तीनों के प्रतिनिधि मौजूद रहने चाहिए, लेकिन अब तक एफसीआई ने यह प्रक्रिया नहीं शुरू की है। एफसीआई से चावल वापस लौटाने से राइस मिलों के गोदाम भर गए हैं। ऐसे में मिलों ने क्रय एजेंसियों से धान लेना बंद कर दिया है। इससे धान खरीद की रफ्तार सुस्त पड़ गई है।
यूपी राइस मिलर्स एसोसिएशन के उपाध्यक्ष मनोज गांधी ने भारतीय खाद्य निगम के एरिया मैनेजर को ज्ञापन भेजा है। इसमें प्रयागराज मंडल के एफसीआई गोदामों की बजाय बांदा, कानपुर मंडल के गोदाम में चावल रखवाने की मांग की गई है। आरोप लगाया गया कि फतेहपुर के गोदामों में राइस मिल वालों को परेशान किया जाता है। अब तक 50 ट्रक चावल अमान्य हो चुका है। एक ट्रक चावल के अमान्य होने में मिल को 30 से 40 हजार रुपये का नुकसान होता है। मिल वालों की समस्याओं को हल नहीं किया गया तो क्रय केंद्र में खरीदे गए धान को नहीं लिया जाएगा।
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