गुरुवार को कचहरी परिसर में एसडीएम बिंदकी जेएन सचान व प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सहायक अभियंता मनोज चौरसिया के बीच मारपीट के मामले ने तूल पकड़ लिया है। मारपीट के आरोपी सहायक अभियंता को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट शिव कुमार की कोर्ट में पेश किया गया। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आरोपी एई ने कोर्ट से जेल भेजने के बजाय न्यायिक अभिरक्षा के साथ जिला अस्पताल में इलाज कराने की अपील की। सीजेएम ने जेल अधीक्षक को आदेश दिए हैं कि सहायक अभियंता की मेडिकल जांच कराई जाए।
बुधवार को बिंदकी एसडीएम जेएन सचान पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड झूंसी इलाहाबाद के सहायक अभियंता मनोज चौरसिया ने तैश में आकर हमला बोल दिया था। बिंदकी पुलिस ने सहायक अभियंता के खिलाफ 452, 307, 308, 333, 353, 323 धारा के अंतर्गत मुकदमा दर्ज किया है। अधिवक्ता महेशकांत त्रिपाठी के साथ सहायक अभियंता मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने पेश हुआ। सहायक अभियंता ने बताया कि उसके ऊपर गलत आरोप लगाकर फंसाया गया है। पुलिस ने बहुत मारा पीटा, जिससे गंभीर चोटें आई हैं। साथ ही थाने में करंट लगाकर प्रताड़ित किया गया है। वह हार्ट का मरीज है और उसने न्यायिक अभिरक्षा के साथ जिला अस्पताल में रहने की मांग की। कोर्ट ने जेल अधीक्षक को वादी की मेडिकल कराने के आदेश दिए हैं।
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दहशत और सदमे में सहायक अभियंता
फ तेहपुर। पुलिस के साथ कोर्ट पहुंचे सहायक अभियंता मनोज चौरसिया बदहवास स्थिति में नजर आए। उनकी आंखों में पुलिस द्वारा बरती गई क्रूरता साफ झलक रही थी। वह इतने सदमे में नजर आ रहे थे कि कुछ भी पूछने में बोलने की हिम्मत नहीं जुटा पाए। कोर्ट में सहायक अभियंता से पूछताछ के दौरान मीडिया कर्मियों को पुलिस के विरोध का सामना भी करना पड़ा। यहां तक की जब सहायक अभियंता की चोटों को देखने का प्रयास किया गया तो पुलिस ने विरोध जताया इस पर सहायक अभियंता के भाई प्रेम चौरसिया और मां कमला चौरसिया ने नाराजगी जताई। सहायक अभियंता की मां और भाई ने बताया कि एसडीएम बिंदकी ने पांच लाख रुपये मांगे और अभद्रता की। गालीगलौज करने के बाद ही मारपीट की नौबत आई। एसडीएम जेएन सचान ने बताया कि आरोपी एई से उसका कोई लेना देना नहीं है। उसके परिजनों ने जो रुपये का आरोप लगाया है, वह झूठा और बेबुनियाद है।