जाफरगंज (फतेहपुर)। फतेहपुर-जहानाबाद मार्ग पर डीसीएम की टक्कर से बाइक सवार जीजा-साले की मौत हो गई। हादसे में हेलमेट भी क्षतिग्रस्त हो गया। पुलिस ने बताया कि जीजा इंटर कालेज में उप प्रधानाचार्य के पद पर कार्यरत थे। शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। हादसे को अंजाम देने वाली डीसीएम की भी तलाश की जा रही है।
थाना क्षेत्र के सैंबसी गांव निवासी अनिल सिंह उर्फ गोपाल (32) पंडित नेहरू विद्यापीठ इंटर कालेज जाफरगंज में उप प्रधानाचार्य के पद पर तैनात थे। वह पत्नी रोली और बेटी अनुभवी के साथ सदर कोतवाली क्षेत्र के खुशवक्तराय नगर मोहल्ले में रहते थे। उनकी पहली शादी बांदा जिले के पैलानी थाना क्षेत्र के लसड़ा गांव की निधि के साथ 2008 में हुई थी। शादी के करीब दो साल बाद निधि की मौत हो गई थी। अनिल ने दूसरी शादी 2013 रामपुर सरसौल जिला कानपुर में की थी।
अनिल किसी काम से सोमवार को पहली पत्नी के मायके गए थे। जहां से चचेरे साले शिवबचन सिंह (35) को लेकर बाइक से जाफरगंज लौट रहे थे। जाफरगंज थाने के ही घुमावदार इटरा मोड़ पर डीसीएम ने बाइक सवार उपप्रधानाचार्य को टक्कर मार दी।
टक्कर लगने पर दोनों बाइक से उछलकर सड़क पर आ गिरे। दोनों के सिर पर चोट लगी। पुलिस को उपप्रधानाचार्य की जेब से पहचान पत्र मिला। जिससे पुलिस ने परिजनों और कालेज में सूचना दी। मृतक के गांव में रहने वाले तीन बड़े भाई संतोष, अशोक, बबलू पहुंचे। थानाध्यक्ष नाहर सिंह ने बताया कि शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है।
हादसे में जान गवांने वाले शिवबचन सिंह की शादी छह माह पहले कानपुर लालबंगला की नेहा सिंह से हुई थी। उसके रिश्तेदार जाफरगंज में रहते थे। इसी वजह से बहनोई के साथ रिश्तेदारों के घर मिलने आ रहा था। मृतक के भाई रामचरन और ऋतुराज मार्च्युरी हाउस पहुंचे। भाइयों ने बताया कि दो साल पहले पिता छंगा की कोरोना से मौत हो गई थी।
- इटरा मोड़ पर अक्सर होते हादसे
जाफरगंज थाना क्षेत्र का इटरा मोड़ बेहद खतरनाक है। घुमावदार मोड़ की वजह से अक्सर जरा सी चूक से हादसे होते हैं। मोड़ की वजह से उपप्रधानाचार्य और उनके साले की मौत मानी जा रही है। इलाकाई लोगों का कहना है कि कई हादसों के बाद भी मोड़ पर कोई संकेतक नहीं लगाया गया है। इससे हादसे थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। कई मर्तबा हंगामा भी हो चुका है।
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