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आईआईएससी से पास हुई थी ओवरब्रिज की डिजाइन

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बीम से अलग हुआ ओवरब्रिज का पिलर। - फोटो : FATEHPUR
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फतेहपुर। 424 करोड़ से बने बांदा-टांडा बाईपास ओवरब्रिज के क्षतिग्रस्त होने के बाद अफसरों ने निर्माण कंपनी को बचाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। घटिया निर्माण की बात न कहकर एनएचएआई के अफसरों ने डिजाइन में ही खोट निकाल दिया। यह डिजाइन इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (आईआईएससी) से पास हुई थी। ऐसे में सवाल उठता है कि डिजाइन को पास करने में आईआईएससी से किस स्तर पर चूक हो गई। दरअसल चूक आईआईएससी से नहीं, निर्माण में बरती गई गंभीर लापरवाही से हुई। इसी के चलते ओवरब्रिज के पिलर बीम का साथ छोड़कर अलग हो गए।
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स्पेन की सेंट जोंस कंपनी को वर्ष 2012-13 में बांदा-टांडा मार्ग के साथ ही बाईपास निर्माण का ठेका दिया गया था। बांदा-टांडा मार्ग की लागत करीब 1200 करोड़ थी। बाईपास का निर्माण 424 करोड़ से हुआ। यूं रेलवे लाइन के ऊपर पुल का निर्माण रेल विभाग करता है। इस ब्रिज की जिम्मेदारी सेंट जोंस कंपनी को दी गई। कंपनी के इंजीनियरों का बनाया नक्शा विश्वसनीयता की कसौटी पर खरा उतराने के लिए रेलवे के साथ आईआईएससी के पास भेजा गया था। दोनों ओर से इस नक्शे को स्वीकृति दे दी गई।
जनवरी 2019 में बाईपास शुरू हुआ। वाहनों के गुजरने पर दिल्ली-हावड़ा रेल लाइन पर बना यह ब्रिज हिलने लगा। वाहनों के भार से पिलर बीम से अलग हो गए। शुक्र रहा कि एनएचएआई को सही समय पर इसकी जानकारी हो गई। एनएचएआई ने पुल पर यातायात रोक दिया। इस पूरे मामले में एनएचएआई के तत्कालीन अफसरों ने निर्माण कंपनी को बचाने के लिए घटिया निर्माण की बात को दबाकर डिजाइन में खामी बता दी। इससे कि मामला दब जाए। इसी से कंपनी पर कार्रवाई के नाम पर ओवरब्रिज के दोबारा बनने पर आने वाले खर्च को ही वहन करने की जिम्मेदारी डाल दी गई।
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बड़ा सवाल: बांदा ओर की लेन ही क्यों हुई क्षतिग्रस्त
बाईपास का बारीकी से निरीक्षण करने के बाद एनएचएआई ने इस खामी के पीछे ओवरलोड ट्रकों को बड़ी वजह बताया है। दरअसल बांदा ओर से आने पर ओवरब्रिज की दायीं ओर की पट्टी के पिलर ही बीम से अलग हुए हैं। इसी लेन की सड़क जगह-जगह क्षतिग्रस्त हुई। वजह स्पष्ट है कि बांदा की ओर से आने वाले ओवरलोड वाहनों का बोझ न तो ओवरब्रिज उठा सका और न ही सड़क। वहीं सवाल यह भी है कि ओवरब्रिज आखिर पांच माह में ही कैसे क्षतिग्रस्त हो गया। यानी निर्माण में मानकों की अनदेखी की गई है।
बांदा-टांडा बाईपास पर बने ओवरब्रिज की डिजाइन को आईआईएससी ने पास किया था। इस डिजाइन के मुताबिक ब्रिज का निर्माण शुरू कराया गया था। पुल के क्षतिग्रस्त होने के पीछे ओवरलोडिंग सबसे बड़ी वजह रही। ओवरलोडिंग के कारण ही बांदा की ओर से आने वाले वाहनों का बोझ दायीं तरफ की पट्टी नहीं उठा सकी। जगह-जगह सड़कें क्षतिग्रस्त हो गईं। सेंट जोंस कंपनी की ओर से निर्माण कार्य में जो भी खामियां सामने आईं, उसके लिए पेनाल्टी लगाई गई है। दोबारा पुल निर्माण पर आने वाला खर्च कंपनी वहन करेगी।
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- नीतिन चौधरी, प्रोजेक्ट मैनेजर, एनएचएआई
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