फतेहपुर। लगभग 12 वर्ष पूर्व बीपीएल सूची तैयार करते समय बरती गई लापरवाही का खामियाजा जिले के हजारों गरीब परिवार भुगत रहे हैं। बीपीएल सूची की फीडिंग में एक सैकड़ा के करीब ग्राम पंचायतों के नाम छूट जाने से इन्हें बीपीएल परिवारों के लिए संचालित योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। किसी को आवास की दरकार है तो किसी को वृद्धावस्था पेंशन की। किसी को सेहत की सलामती के लिए स्मार्ट हेल्थ चाहिए तो किसी को शादी अनुदान (अब पिछड़े वर्ग के लिए नहीं) की। ऐसे बीपीएल सूची विहीन गांवों की संख्या सभी ब्लाकाें में हैं। बानगी के तौर पर तेलियानी ब्लाक की ग्राम पंचायत जगतरपुर गांडा को लें। यहां की आबादी करीब पांच हजार है। इस ग्राम पंचायत के वर्ष 2002 में जारी हुई बीपीएल सूची से गायब होने से मौजूदा समय में यहां के करीब एक सैकड़ा गरीब परिवारों को बीपीएल होते हुए भी बीपीएल श्रेणी की आवास, योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। जगतपुर गांडा के ग्राम रोजगार सेवक ओम प्रकाश कहते हैं कि बीपीएल सूची की फीडिंग के दौरान हुई चूक के चलते यह ग्राम पंचायत सूची से बाहर हो गई। कई बार बीपीएल सूची न होने की स्थिति ऊपर तक रखी जा चुकी है। बीपीएल सूची विहीन जगतपुर गांडा में असई का पुरवा और देवरी भैचक मजरे शामिल हैं। वित्तीय वर्ष 2011 में जगतपुर गांडा को अंबेडकर गांव का दर्जा मिला। गांव के राम चंद्र कहते हैं कि एक दशक से ज्यादा समय हो गया है परंतु अभी तक गरीबों की सुधि न तो नेताओं को आई और न ही सरकारी मुलाजिमों को। गांव के युवा राकेश कुमार का कहना है कि यदि इसी तरह से ग्राम पंचायत स्तर पर चूक होती रही तो फिर देश के एक एक करके गरीब परिवार, गरीब होते हुए रईसों की श्रेणी में शुमार हो जाएंगे।
बीपीएल सूची से इन योजनाओं पर मिलता लाभ-
- आवास
- वृद्धावस्था पेंशन
- विधवा पेंशन
- शादी अनुदान
- स्मार्ट हेल्थ कार्ड
- वजीफा
- निशुल्क बिजली कनेक्शन
कोट
‘चालू पंचवर्षीय में एक ढेला काम विकास के नाम पर नहीं हो सका है। बीपीएल सूची न होने से गांव के तमाम जरूरतमंदों को बीपीएल श्रेणी का लाभ नहीं मिल पा रहा है। बीपीएल सूची में ग्राम पंचायत का नाम इंद्राज कराने को कई बार ब्लाक से लेकर विकास भवन तक की भागदौड़ की है’। - बुद्ध प्रकाश, प्रधान, जगतपुर गांडा
‘बीपीएल सूची 2002 बनने में हुई चूक से जिले की कई ग्राम पंचायतें छूट गईं हैं जिनमें से करीब 70 से 80 तो अकेले राजस्व गांव हैं। गरीब परिवारों का नये सिरे से सर्वे किया गया है। नई सूची के प्रिंट होने पर छूटे गांवों को बीपीएल सूची में शामिल कर लिया जाएगा’। - मिथलेश कुमारी सचान, डीडीओ, फतेहपुर