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डोली भूमि गिरत दसकंधर

Sun, 05 Oct 2014 05:32 AM IST
Fatehpur
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फतेहपुर। दोआबा में दशहरा महोत्सव धूमधाम से मनाया गया। विजयदशमी पर एतिहासिक दशानन वध की जगह जगह धूम रही। बिंदकी के दशहरा मेला में राम-रावण युद्ध देखने को हुजूम उमड़ पड़ा। मेला स्थल पर इटैलियन आतिशबाजी की छटा के बीच रावण के धराशाई होते ही समूची बिंदकी जय जय श्रीराम के जयघोष से गूंज उठा। शहर में भी कई स्थानों पर रावण के साथ मेघनाद, कुंभकरण व अंगद के पुतले दहन किए गए। देर शाम निकली देवी-देवताओं की यात्रा में जगह-जगह पुष्पवर्षा हुई। दशहरा की बधाइंया देने के लिए लोग एक-दूसरे के घर पहुंचे।
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घमासान युद्ध के बाद सत्य की फहरी पताका
- बारूद से भरी सोने की लंका में आतिशबाजी देख दर्शक मंत्रमुग्ध
- लक्ष्मण को शक्ति, लंका दहन के मंचन को देख लगे जयकारे

बिंदकी। रामलीला मैदान में आयोजित महोत्सव में रोमांचकारी युद्ध के बीच आखिर राम के हाथों अहंकारी रावण मारा गया। करीब डेढ़ घंटे तक राम व रावण दल के बीच घमासान युद्ध हुआ। दोनाें ओर से तीरों की बौछारें हुईं। युद्ध के दौरान मेघनाथ के हाथाें जब लक्ष्मण को नागपाश की शक्ति लगती है और लक्ष्मण मूर्छित हो जाते हैं, उस समय भगवान पुरुषोत्तम राम का विलाप सुन सभी दर्शकों की आंखें नम हो गईं।
शुक्रवार को रामलीला मैदान में राम व रावण दल के बीच युद्ध देखने के लिए हजारों की संख्या में दर्शक जुटे। मेला मैदान के युद्ध स्थल में रामदल के प्रवेश करते ही जय श्री राम के नारे लगे। इसके बाद भगवान राम की सेना और रावण की सेना में युद्ध हुआ। दोनों के बीच संवाद के साथ साथ एक दूसरे पर तीर बरसाए गए। इस युद्ध में जब मेघनाथ अपने को परास्त देखता है तो वह अंतिम अस्त्र नागपाश चलाता है तो लक्ष्मण मूर्छित हो जाते हैं। इससे दर्शकों की आंखें नम हो जाती है और राम की सेना शोक में डूब जाती है। बाद में हनुमान सुषैन वैद्य के कहने से संजीवनी बूटी लाते हैं और इससे लक्ष्मण की मूर्छा टूट जाती है। एक बार फिर घमासान होता है और एक- एक कर मेघनाथ, कुंभकरण मारे जाते हैं, तब रावण अट्टहास करते हुए युद्ध मैदान में राम की सेना का मुकाबला करने पहुंचता है, लेकिन भगवान राम के हाथों उसका वध किया जाता है। इस दौरान बारूद से भरी सोने की लंका में आतिशबाजी देख दर्शक मंत्रमुग्ध हो जाते हैं। इस दौरान जिलाधिकारी राकेश कुमार, एसपी विनोद कुमार सिंह, बसपा विधायक सुखदेव वर्मा, पूर्व मंत्री जनसेवक अमरजीत सिंह, लोकनाथ पांडेय आदि मौजूद रहे। उधर, फतेहपुर सदर में भी कई स्थानाें पर रावण के पुतले फूंके गए। राम नगर कालोनी, राधानगर, हरिहरगंज, मसवानी में शाम होते ही यह उल्लास पटाखों की गूंज में समाहित हो गया। जहानाबाद कस्बे के पंचायती रामलीला कमेटी की ओर से तत्वावधान में आयोजित रामलीला में राम के हाथों अहंकारी रावण का अंत किया गया। वध के उपरांत रावण का पुतला दहन किया गया। शुभम जागरण मंच के दुर्गा पांडाल मेें शुक्रवार को विशाल भंडारे का आयोजन हुआ। जिसमें करीब चार कुंतल आटे की पूड़ियां बेली गईं। देवी भक्त बूंदी के साथ राहगीरों को भंडारे की राह दिखाते रहे। यहां की दुर्गा प्रतिमा भूमि विर्सजन के लिए शनिवार रवाना होगी।
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हनुमान मंदिर की सजावट आकर्षण का केंद्र
बिंदकी। रामलीला मैदान स्थित प्राचीन हनुमान मंदिर की सजावट दर्शकों के बीच आकर्षण का केंद्र रही। दर्शकों ने यहां पहुंचकर वीर हनुमान के दर्शन कर मन्नतें मानीं और यहां प्रसाद ग्रहण किया। दशहरा महोत्सव के मेले का निरीक्षण जिलाधिकारी राकेश कुमार, एसपी विनोद कुमार सिंह, एएसपी अरविंद मिश्रा ने मेले का निरीक्षण किया और राम-रावण युद्ध अतिशबाजी का लुत्फ उठाया। मेले की सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस बल चप्पे-चप्पे पर तैनात रहा।

नीलकंड के दर्शन कर कमाया पुण्य
फतेहपुर। विजयादशमी के दिन नीलकंठ के दर्शन को शुभ माना गया है। आचार्य केके पांडेय कहते हैं कि भगवान श्री शंकर ने जहर का पान किया तो उनका कंठ नीला पड़ गया था। तब से नीलकंठ को भगवान शंकर के रूप में देखा जाने लगा है। लेकिन जिस प्रकार से वातावरण में प्रदूषण का जहर घुलता जा रहा है उससे पशु पक्षी वन्य जीव लुप्त हो रहे हैं। ऐसे में इधर कुछेक साल से नीलकंठ विलुप्त जैसा नजर आ रहा है। शहर से लेकर गांवाें तक में नीलकंठ को देखने के लिए ना जाने कितनी निगाहें आसमान की ओर टिकीं रहीं।

इंसेट
पान विक्रेताओं की पौबारह
दशहरा में गले शिकवे भूलकर लोग एक दूसरे के गले मिले और पर्व की बधाई दी। इस मेल मिलाप की अगुवाई पान ने की। दशहरा मिलने घर आए मेहमानों का मेजबानों के सामने मिठाई की प्लेट बढ़ाने से पहले पान से स्वागत किया। पान की मिठास को भाई चारे में घुलने की चाहत लिए हुई इस मेहमाननवाजी से पान की बिक्री में खासा इजाफा हुआ। शहर के पटेल नगर चौराहा के ज्ञान पान वाला हो या फिर सादीपुर चौराहे के जगदीश। सभी काउंटरों पर सुबह से लेकर देरशाम तक पान से एक दूसरे का इस्तकबाल होता रहा।
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