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पखवारेभर में आठ मौतें

Mon, 23 Jun 2014 05:32 AM IST
Fatehpur
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फतेहपुर। हीट स्ट्रोक, डायरिया, उल्टी-दस्त के साथ संक्रामक रोगों का हमला दिनोंदिन तेज होता जा रहा है। रविवार को गोपालगंज पीएचसी से संबद्ध गांव रेवाड़ी की मासूम शिफा की डायरिया से मौत के बाद पखवारेभर में मृतकों की संख्या आठ पहुंच गई। बड़ी तादाद में संक्रामक बीमारियों से पीड़ित रोगियों का सरकारी व निजी अस्पतालों में इलाज चल रहा है। शनिवार को हूसेपुर गांव में डायरिया फैलने से तीन दर्जन से अधिक ग्रामीण बीमार हो गए। दर्जन भर रोगियों को खजुहा पीएचसी का ताला बंद होने से बिंदकी सीएचसी ले जाना पड़ा। जबकि अन्य मरीजों का झोलाछाप डॉक्टरों से इलाज कराना पड़ा। एक साथ इतने रोगियों के सामने आने के बाद भी के बावजूद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने प्रभावित गांवों में नहीं पहुंची। एक रिपोर्ट -------------
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उल्टी-दस्त से मासूम की मौत
फतेहपुर। रेवाड़ी गांव निवासी शफीक अहमद का परिवार उल्टी, दस्त, बुखार से पीड़ित चल रहा है। तीन साल की बेटी शिफा दो दिन से उल्टी-दस्त से पीड़ित थी। गांव में झोलाछाप डाक्टर से इलाज चल रहा था। रविवार सुबह शिफा की हालत अधिक बिगड़ गई। परिजन उसे जिला अस्पताल लेकर गए। जहां पर डाक्टर ने मासूम को मृत घोषित कर दिया। गांव में रहीश, बिंदा, रामकिशुन, जैनुल, रेहान के परिवारों में भी बीमारी का कहर बरप रही है। वे नर्सिंगहोम में इलाज करा रहे हैं।

हूसेपूर में डायरिया फैलने से दहशत
- पीएचसी में तालाबंद, सीएचसी जाकर कराया इलाज
- चौबीस घंटे बाद भी स्वास्थ्य टीम गांव नहीं पहुंची
खजुहा। चौबीस घंटे के अंतराल में खजुहा पीएचसी से संबंद्ध हूसेपुर गांव में डायरिया फैलने से तीन दर्जन से अधिक लोग बीमार हो गए। दर्जन भर पीड़ितों को उपचार के लिए बिंदकी स्थित सीएचसी ले जाना पड़ा। दोपहर बाद खजुहा के सरकारी अस्पताल का स्टाफ नदारद था। कमोबेश यही हाल रविवार का रहा। पीड़ित गांव में स्वास्थ्य विभाग की टीम के न पहुंचने से ग्रामीणों में डायरिया को लेकर साफ दहशत है।
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सरकारी अस्पतालों का कड़ुवा सच शनिवार की शाम सामने आ गया। खजुहा पीएचसी के गांव हूसेपुर में अचानक एक-एक करके तीन दर्जन से अधिक ग्रामीण डायरिया से जकड़ गए। परिजन, अपने मरीजों को लेकर पीएचसी पहुंचे तो वहां पर ताला बंद था। क्योंकि ज्यादातर दिनों में यह अस्पताल दोपहर दो बजे के बाद तालाबंदी का शिकार हो जाता है। इनमें नाजुक हालत पर दर्जन भर मरीजों को बिंदकी सीएचसी ले जाया गया।


पूरे दिन टीम का करते रहे इंतजार
स्वास्थ्य विभाग की उदासीनता से इस गांव में डायरिया को लेकर खौफ है। ग्रामीण स्वास्थ्य टीम का सारा दिन इंतजार करते रहे, लेकिन वहां पर एक भी डॉक्टर नहीं पहुंचा। खजुहा के एमओआईसी डॉ. आरके सिंह से बात की गई तो बताया कि रविवार की वजह से दोपहर 12 बजे तक अस्पताल में डॉ. सुनील शुक्ला मौजूद थे, जबकि अस्पताल में बंद ताला इस बात को सिरे से नकार रहा है।

एक पखवारे में खामोश हुईं जिंदगी
- 09 जून को नार्थ सिटी के रिक्शा चालक रघ्घू की आबूनगर पुलिस चौकी के पास लू लगने से मौत। इसी दिन असोथर पीएचसी के जरौली गांव निवासी बड़कऊ पुत्र शंकरलाल की मौत हो गई थी। बड़कऊ को मवेशी चराते लू लगी।
- 10 जून को धाता पीएचसी के उरई गांव निवासी पप्पू की 14 वर्षीय पुत्री रिंकी की डायरिया से मौत। इसी दिन हुसैनगंज सीएचसी के मवई-कनईपर गांव में डायरिया से रघुवीर की 10 वर्षीय नातिन मोहिनी व प्रमोद के तीन साल के पुत्र की मौत।
- 11 जून को गोपालगंज पीएचसी के अंतर्गत पड़ने वाले कुरुस्तीकला रेलवे स्टेशन में लू लगने से एक अधेड़ की मौत।
- 12 जून को नार्थ सिटी के चतुरी का पुरवा निवासी कौशर शाह की लू लगने से मौत।
- 22 जून को गोपालगंज पीएचसी के रेवाड़ी गांव के शफीक की 3 वर्षीय बेटी शिफा की डायरिया से मौत।


क्या कहते हैं जिम्मेदार
संक्रामक बीमारी से निपटने के लिए सेल तैयार है। पीएचसी व सीएचसी की टीमें भेज कर स्थिति को नियंत्रण में किया जाता है। मेजर प्रॉब्लम की जानकारी मिलने पर जिले से मोबाइल टीम भेजी जाती है। हूसेपुर गांव में डायरिया फैलने की जानकारी नहीं है। वैसे इस अस्पताल की बाधित सेवाओं को लेकर कई बार लिखा है, लेकिन कार्रवाई नहीं हो सकी है। यही वजह रही कि बीमारी फैलने के बावजूद संक्रामक सेल को इत्तला नहीं की गई। - डॉ. एलआर सचान, एसीएमओ/ संक्रामक सेल प्रभारी
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