फतेहपुर। यूपी की मेरिट लिस्ट में स्थान हासिल करने वाले जिले के होनहारों को अभी तक मंजिल भले नहीं मिली है, लेकिन अपने मिशन को पूरा करने का जज्बा बरकरार है, सभी शिद्दत के साथ अलग-अलग क्षेत्रों में तैयारी कर रहे हैं। हमने बीते पांच वर्षों में यूपी बोर्ड इंटर और हाईस्कूल में जिले के टॉपरों से बातचीत की। कुछ ने नौकरियों में आरक्षण व्यवस्था पर उंगली उठाई तो कुछ ने हिंदी माध्यम से पढ़ाई को सफलता की राह में रोड़ा बताया। बातचीत में एक रोचक तथ्य जरूर उभर कर आया कि निजी क्षेत्रों में लाखों के पैकेज के बावजूद छात्र-छात्राओं में सरकारी नौकरी खासकर आईएएस के प्रति क्रेज बढ़ा है। इंटर 2010 में प्रदेश की मेरिट में तीसरा स्थान पाने वाले सरस्वती विद्या मंदिर के छात्र राजस्थान में बीटेक अंतिम वर्ष की पढ़ाई पूरी कर रहा है। इंटरमीडिएट 2011 में जिले के टापर इसी कालेज के छात्र अंकित दीक्षित ने फिलहाल आईएएस का सपना त्याग दिया है और कानपुर में इंजीनियरिंग के एक निजी कॉलेज में पढ़ाई कर रहा है। टॉपर का कहना है कि आरक्षण व्यवस्था जनरल श्रेणी के टॉपरों को वह सम्मान दिलाने में बाधक है, जिसके वह असली हकदार हैं। 2012 में इंटर में जिले के टापर आयुष अग्रहरि भी आईएएस बनना चाहते थे, लेकिन वह कानपुर में इंजीनियरिंग कर रहा है। उसका कहना है कि वह प्रतियोगी परीक्षाओं में किसमत आजमा रहा है। इसी तरह 2013 में प्रदेश की मेरिट सूची में तीसरे स्थान रहे आकाश गुप्ता दिल्ली में बीएससी की कोचिंग कर रहा है। उसका सपना आईएएस बनने का है। साधारण परिवार में जन्मे इस होनहार का कहना है कि जिले के टॉपरों को आगे बढ़ने में यहां के स्कूलों की हिंदी मीडियम की पढ़ाई बाधक है। प्रदेश की मेरिट सूची में सातवां स्थान हासिल करने वाले अमित सिंह राठौर आईएएस की कोचिंग पूरी कर चुका है। बोर्ड परीक्षा 2014 में प्रदेश की मेरिट में तीसरा स्थान पाने वाली पल्लवी गुप्ता भी इंजीनियर बनकर देश की सेवा करना चाहती है।
हाईस्कूल बोर्ड के टापरों की स्थिति
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फोटो परिचय:-
15-लोकेंद्र सिंह
16-सत्यम शुक्ला
17-रुचिर सिंह
हाईस्कूल 2011 में टाप करने वाले सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कालेज के छात्र रुचिर सिंह कानपुर में बीएससी कर रहे हैं। उनका कहना हैं कि आईएएस बनने का संकल्प बना रखा है। वर्ष 2012 में हाईस्कूल में प्रदेश में दूसरा स्थान हासिल करने वाले जिले के छात्र लोकेंद्र सिंह इस बार इंटर की परीक्षा उत्तीर्ण की है। हालांकि इस परीक्षा में वह टापर नहीं बन पाए हैं, लेकिन आईएएस बनने के लिए कोचिंग शुरू करने की तैयारी में है। 2013 में हाईस्कूल में टापर छात्र सत्यम शुक्ला डाक्टर बनना चाहता है। 2014 में टापर श्वेता पटेल का लक्ष्य आईआईटी में प्रवेश पाकर कुशल इंजीनियर बनने की है। वह आईआईटी की कोचिंग अलग से करेगी। वह किसी भी कीमत में लक्ष्य हासिल करने के लिए बेताब दिख रही है।