फतेहपुर। मौसम का कहर घातक साबित हो रहा है। सरकारी व निजी अस्पतालों में मौसमी बीमारियों से ग्रसित मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। लूज मोशन की तादाद सबसे ज्यादा है। तो मलेरिया के रोगियों की भी भरमार है। सदर अस्पताल की ओपीडी से लेकर आईपीडी तक मेें ऐसे रोगियों की भरमार है। चिकित्सकों की कमी से इस बड़े अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाएं भी हाशिए पर नजर आ रही हैं।
करीब महीने भर से संक्रामक व मच्छरजनित बीमारियों का प्रकोप है। खासकर, गंगा कटरी व यमुना तिरहार की बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं से तो वहां की जनता कराह रही है। कटरी व तिरहार के लोग सरकारी अस्पतालों की कमी और डॉक्टर समेत स्टाफ की मनमानी का शिकार हो रहे हैं। सदर अस्पताल समेत जिला मुख्यालय के निजी अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है।
मंगलवार को सदर अस्पताल की ओपीडी में लूज मोशन के मरीजों को तांता लगा रहा। ओपीडी का हर चैंबर ऐसे मरीजों के लिए आशा की किरण बना रहा। शायद यही वजह थी कि सर्जन के चैंबर के बाहर भी संक्रामक व मच्छरजनित बीमारों की मौजूदगी दिखाई दी। आईपीडी के तीनों वार्ड में भी इन बीमारियों के कहर का साफ खुलासा होता रहा। एक सैकड़ा से ज्यादा बेड वाले इस अस्पताल में लूज मोशन से प्रभावित मरीजों की भरमार रही। पैथालाजी विभाग में हर रोज एक-दो मलेरिया रोगी उभर कर सामने आ रहे हैं। पीवी पाजीटिव के मंगलवार को भी दो मामले जांच में सामने आए।
एक तिहाई लूज मोशन के रोगी
सदर अस्पताल के ओपीडी के चैंबर नंबर छह में बैठने वाले चिकित्सक डॉ. केके पांडेय ने बताया कि मंगलवार को 80 मरीज देखे गए। इनमें से 25 रोगी लूज मोशन के रहे। इसके अलावा एक मामला पीवी पाजीटिव का भी रहा। यह स्थिति लगभग सप्ताह भर से बनी है।
क्या कहते हैं जवाबदेह
बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने के प्रयास जारी हैं। मंगलवार को कुछ राहत की बात रही। क्योंकि 118 बेड वाले इस अस्पताल में इस दिन 107 मरीज भर्ती हैं। जबकि सोमवार की यह संख्या 145 थी।
डॉ. ओपी द्विवेदी, सीएमएस, सदर अस्पताल
चिकित्सकों की कमी से ग्रामीण क्षेत्र की सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। इस स्थिति को शासन स्तर तक पहुंचाया जा चुका है। फिर भी मौजूदा स्टाफ से अच्छी सेवाएं देने की दिशा में काम हो रहा है।
डॉ. मुरारी प्रसाद वर्मा, सीएमओ, फतेहपुर