परिषदीय स्कूलों की पेयजल व्यवस्था जलनिगम की भेंट चढ़ गई है। सालों से 691
स्कूलों में हैंडपंप स्थायी रूप से खराब हैं, लेकिन बेसिक शिक्षा विभाग की
रिपोर्ट के बावजूद जल निगम खराब हैंडपंपों की सुधि नहीं ले रहा है।
हैंडपंप खराब होने से बच्चों को पीने के पानी के लिए दिक्कतों का सामना
करना पड़ रहा है।
जिले के कुल 1903 प्राथमिक स्कूलों में 458 के हैंडपंप
सालों से खराब हैं। इसी तरह से कुल 743 उच्च प्राथमिक स्कूलों में 233 के
हैंडपंप खराब हैं। वर्तमान समय में जिले के 2650 परिषदीय स्कूलों में 691
की पेयजल आपूर्ति पूरी तरह से ध्वस्त है।
बेसिक शिक्षा विभाग सालों से
हैंडपंप ठीक कराने के लिए जलनिगम को लिखा पढ़ी करता आ रहा है, लेकिन अभी तक
हैंडपंप ठीक नहीं कराए गए हैं। हैंडपंप खराब होने से गर्मी के मौसम में
बच्चों को जहां पीने के पानी की भीषण किल्लत का सामना करना पड़ता है, वहीं
हर मौसम में एमडीएम खाने के बाद बच्चे पानी पीने के लिए अपने घर चले जाते
हैं।
इसके बाद शायद ही कोई बच्चा स्कूल वापस लौटता हो। ऐसी हालत में
हैंडपंपों की खराबी से स्कूलों की पढ़ाई पूरी तरह से प्रभावित हो रही है।
इतना ही नहीं रसोइयों को एमडीएम के बर्तनों की सफाई के लिए दूर से पानी
लाना मजबूरी है।
पानी संकट के कारण रसोइयां बर्तनों की सफाई में कंजूसी
बरतती हैं, जिसका बच्चों के स्वास्थ्य पर विपरीत असर पड़ रहा है। वरिष्ठ
चिकित्सक डा. एसके सिंह का कहना है कि भोजन पकाने से लेकर खाने तक में साफ
सफाई का बहुत ही महत्व है। गंदे बर्तन में पकाया गया खाना बच्चों के
स्वास्थ्य पर विपरीत असर डाल सकता है।
बच्चे संक्रामक बीमारियों से ग्रसित
हो सकते हैं। इतना नहीं खाने के पहले बच्चों के हाथों की सफाई बहुत ही
आवश्यक है। जलनिगम के अधिशासी अभियंता आनंदमूर्ति श्रीवास्तव का कहना है कि
शासन से रिबोर के लिए एक निश्चित बजट मिलता है।
इससे पूरे जिले के स्थायी
रूप से खराब हैंडपंपों की मरम्मत कराई जाती है। फिर भी विभाग स्कूलों के
हैंडपंपों का रिबोर प्राथमिकता के आधार पर कराता है। बेसिक शिक्षा विभाग से
खराब हैंडपंपों की प्राप्त सूची के हैंडपंपों के रिबोर कराए जा रहे हैं।
अवकाश समाप्त होने के बाद सही स्थिति की जानकारी दी जा सकती है।