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गलती प्रशासन की, भुगत रहे भेड़ पालक

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गलती प्रशासन की, भुगत रहे भेड़ पालक
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बिंदकी। दैवी आपदा में 112 भेड़ों की मौत का मुआवजा डेढ़ साल बाद भी पालकों को नहीं मिला है। प्रशासन की गलती का खामियाजा पशु पालकों भुगतना पड़ रहा है। मुआवजे की रकम आने के बाद शासन में वापस लौट गई। अब पीड़ितों ने तहसीलदार पर आरोप लगाते हुए सीएम को मेल भेजी है।

मुख्यमंत्री को ई-मेल के जरिए भेजे गए शिकायती पत्र में खजुहा विकास खंड के दरियापुर के मजरे अकिलाबाद निवासी रतीराम ने कहा है कि सात मार्च 2016 को ओलावृष्टि हुई थी। उनकी 18, गांव के देवीचरण की 22, ननकू की 20, खेलावन की 16, पप्पू की 15, प्यारे की 21 भेड़ मर गई थीं। इनका पोस्टमार्टम कराकर मुआवजा की फ ाइल राजस्व कर्मियों ने तैयार की थी।
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तहसीलदार लाल सिंह यादव के यहां डेढ़ वर्ष से मुआवजा पाने के लिए भेड़ पालक दर्जनों चक्कर काटकर हार चुके हैं। मुआवजा नहीं मिला। शिकायतकर्ता ने कहा कि 18 जुलाई को बिंदकी में आयोजित तहसील दिवस में आए डीएम को शिकायती पत्र देने के लिए पहुंचे तो सभागार गेट पर खड़े तहसीलदार ने डीएम से नहीं मिलने दिया।

इन्होंने मुआवजा की गुहार लगाते हुए दोषीजनों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। दूसरी ओर तहसीलदार का कहना है कि कानूनगो व अधीनस्थ कर्मचारियों ने समय से पूरी रिपोर्ट लगाकर फाइल नहीं भेजी। इससे मुआवजे की रकम वापस लौट गई।
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- ओलावृष्टि में हुई थी 112 भेड़ों की मौत, सीएम को मेल भेजकर तहसीलदार पर लगाया आरोप
अमर उजाला ब्यूरो

क्या कहते हैं एसडीएम
बिंदकी। एसडीएम सत्यप्रकाश सिंह का कहना है कि मामला उनकी तैनाती से पहले का हैैै। इतनी अधिक संख्या में भेड़ों के मरने के मामले की तहसीलदार को खुद निगरानी करनी चाहिए थी। यदि मुआवजा नहीं मिला और धनराशि वापस चली गई, तो दोषीजनों पर कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने मामले को संज्ञान में लेकर जांच के बाद कार्रवाई करने की बात कही है।
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