प्रशिक्षण शिविरों का पुलिस के पास रिकार्ड नहीं
फतेहपुर। शहर में संचालित प्रशिक्षण शिविरों की गतिविधियों की बाबत पुलिस के पास रिकार्ड नहीं है। सालों पहले एलआईयू ने एक बार जांच की थी। इसमें कं पनी के लोगों ने मार्केटिंग कोर्स की ट्रेनिंग का हवाला देकर शांत करा दिया था।
शहर में तीन साल से संदिग्ध शिविर संचालित हो रहे हैं। यहां पश्चिम बंगाल, जम्मू कश्मीर, असम, गुजरात, बिहार, महाराष्ट्र के युवाओं का आना-जाना होता है। वर्तमान में दो से तीन कैंप लखनऊ हाईवे बाईपास चौराहे और आबूनगर इलाके में चल रहे हैं। ट्रेनिंग देने वालों में कोई भी शहर का व्यक्ति नहीं है।
ट्रेनिंग लेेने व देने वाले स्थानीय लोगों से कतराते हैं। संदिग्ध आतंकी सलीम खान के पकड़े जाने के बाद इन कैंपों के आसपास से गुजरने वाले आवाजें सुनकर सहम जाते हैं। कैंप के छात्र अलग-अलग इलाकों में किराये के घरों में रहते हैं। पुलिस का किरायेदारों के सत्यापन का दावा भी फेल है। इनके सत्यापित दस्तावेज पुलिस के पास नहीं है। पुलिस 100 छात्रों के सत्यापन का दावा करती है।
- पिछले तीन साल से हो रहा संचालन, कई जगहों पर कई सैकड़ा की तादाद में युवक ले रहे ट्रेनिंग
अमर उजाला ब्यूरो
प्रशिक्षण शिविरों की जानकारी एलआईयू को भेजकर कराई गई थी। यहां मार्केटिंग का प्रशिक्षण हो रहा है, ऐसा बताया गया। गैर प्रांतों के लड़के होना और बड़े शहरों को छोड़कर शहर में कैंप संचालित करना, कई सवाल पैदा करता है। एलआईयू को भेजकर दोबारा जांच कराई जाएगी।
कवींद्र प्रताप सिंह, एसपी
नागरिकों के जेहन में कौंधते सवाल
- छोटे से शहर को ऐसे कैंप के लिए क्यों चुना गया।
- कैंप में जाने वाले छात्रों को किसी से बात की इजाजत क्यों नहीं दी गई।
- मार्के टिंग कैंप का रजिस्ट्रेशन क्यों नहीं हुआ।
- मार्केटिंग के फंडे सिखाने के लिए सूनसान जगह क्यों चुनी गई।