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पचास फीसदी नुकसान वालों को ही मिलेगा बीमा लाभ

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फतेहपुर। ओलावृष्टि से फसल नुकसान होने का मुआवजा अलग-अलग कोष से मिलेगा। जिन किसानों का 50 फीसदी या उससे ऊपर नुकसान हुआ है, उन्हें बीमा का लाभ मिलेगा। इससे कम नुकसान वाले किसानों की मदद राजस्व टीम दैवी आपदा कोष से करेगी।
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बता दें कि राजस्व विभाग ने सिंचित क्षेत्र के किसानों को 13,500 रुपये और असिंचित क्षेत्र के किसानों को 6800 रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से मुआवजा देना तय किया है। बीमा कंपनी ने प्रीमियम के आधार पर अलग-अलग मानक रखे हैं। मार्च के पहले पखवारे में दो बार हुई ओलावृष्टि से गेहूं, चना, राई, सरसों, आलू, अरहर की फसलें ज्यादा बर्बाद हुई हैं। इसमें करीब 98 हजार किसानों की फसलें नष्ट हुई हैं। आपदा के इस बर्बादी से किसान उबर नहीं पा रहे हैं।
कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार किसानों को उत्पादन का एक चौथाई मुआवजा दिया जा रहा है। वहीं फसल बीमा का प्रीमियम जमा करने वाले किसानों की फसलों में नुकसान का अभी कंपनी कांट-छांट कर रही है। राजस्व विभाग की रिपोर्ट में अब बीमा कंपनी छंटनी करना शुरू कर दिया है। हालांकि अभी इसकी रिपोर्ट कृषि विभाग को नहीं मिली है। जबकि ओलावृष्टि के नुकसान में जो रिपोर्ट बनी है, उसमें 2115 किसान ऐसे हैं, जिन्होंने फसल बीमा का प्रीमियम जमा किया है।
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बीमा में इस तरह मिलेगा फायदा
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से फसलों का बीमा कराने वाले किसानों को कृषि विभाग की अनुमानित लागत में 10 फीसदी जोड़ कर नुकसान का मुआवजा मिलेगा। इसमें 25 फीसदी धनराशि एक महीना के अंदर किसानों के खाते में पहुंचेगी। 75 फीसदी धनराशि क्रॉप कटिंग के आधार पर फसलों के उत्पादन की रिपोर्ट पर बनेगी। इसका सात वर्ष के पांच सामान्य औसत उत्पादन से मिलान किया जाएगा। उसके बाद बची हुई धनराशि का भुगतान होगा।
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कृषि विभाग की फसलों से अनुमानित लागत
फसल का नाम धनराशि
गेहूं 50390
अरहर 32956
चना 34165
राई/सरसों 28008
आलू 130680
मटर 32046
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ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों की जो सूची मिली है। उसमें 2115 किसानों ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में प्रीमियम जमा कर फसलों का बीमा कराया है। बीमा कंपनी व कृषि विभाग की टीम उस सूची से पहले 50 प्रतिशत से अधिक फसलों का नुकसान होने वाले किसानों की रिपोर्ट तैयार की जा रही है। एक महीना के अंदर किसानों के खाता में फसल के मुआवजा की धनराशि पहुंच जाएगी।
- बृजेश सिंह (जिला कृषि अधिकारी)
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जिनका बीमा नहीं हुआ है या जिन्हें राजस्व विभाग की ओर से आर्थिक मदद दी जानी है, उनका सर्वेक्षण कराकर वितरण कराया जा रहा है। नुकसान का आंकलन करने वाली राजस्व टीम ने रिपोर्ट दे दी है, उसे शासन को भेजा भी जा चुका है।
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पप्पू गुप्ता (एडीएम)
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