कल्यानपुर थाना क्षेत्र के गांव दूधी कगार में आग लगने से 27 घर जलकर राख हो गए। जिससे ग्रामीणों की मेहनत कर जोड़ी गई जमापूंजी, राशन सब आग की भेंट चढ़ गया। ग्रामीण का आरोप है कि फायर ब्रिगेड की लापरवाही से 27 घर जलकर राख हो गए। कहा कि यदि दमकल बिना पानी के नहीं पहुंचती तो आग पर काबू पाया जा सकता था। गांव में आग न बुझने तक कोहराम मचा रहा। इसके बाद आग की दहशत घर कर गई। एसडीएम ने गांव पहुंचे और ग्रामीणों को ढांढस बंधाते हुए मामला संभाला।
शुक्रवार को दोपहर लगभग एक बजे दूधी कगार निवासी किसान राजकुमार के घर से लगी आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। जिससे ग्रामीणों में हड़कंप मच गया। लोग अपने घरों व हैंडपंपों के पानी से आग बुझाने में जुट गए। हालात बिगड़ते देख फायर ब्रिगेड को सूचना दी गई।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि अधिकांश हैंडपंप खराब होने व बगैर पानी के दमकल की गाड़ी पहुंचने पर आग को काबू करने में ज्यादा वक्त लगा। इससे अर्जुन, कुंवर बहादुर, पत्तर, मदनलाल, मोहनलाल, सूरजदीन, होरीलाल, मोतीलाल, फुद़दी, राम प्रसाद, केशन, भिखारी, लवकेश, ऊषा, आशा, गोरेलाल, भजन, रामचंद्र, बदलू, जगतपाल, सुमन, धर्मेंद्र, रूकमीना, जनक दुलारी, तेजा आदि के घर जल गए।
इस अग्निकांड में नगदी, जेवरात, कपड़ा समेत आदि लाखों रुपये की गृहस्थी का सामान की क्षति अग्निपीड़ितों को उठानी पड़ी है। ग्रामीणों ने बताया कि गांव में नौ हैंडपंपों में सात काफी अर्से से खराब पड़े हैं। जिन्हें बनवाने के लिए दर्जनों बार तहसील दिवसों और अधिकारियों से कहा गया, लेकिन किसी के कानो में जूं नहीं रेंगी।
यदि हैंडपंपों को समय रहते ठीक करा दिया जाता तो इतनी अधिक हुई क्षति को आग बुझाकर बचाया जा सकता था। सीएफओ आरबी गौतम ने बताया कि दूधी कगार में आग बुझाने बिंदकी फायर स्टेशन से छोटी गाड़ी पहुंची थी। जिसमें ढाई हजार लीटर पानी होता है।
पानी खत्म हो जाने के बाद सदर से दो दमकल गई थी। वहां पर गाड़ियां लगाने की जगह नहीं थी। इसी वजह से नलकूप से पानी लेकर आग बुझाई गई। आरोप सही नहीं लगता कि दमकल बिना पानी के पहुंची। फायर स्टेशन में गाड़ियां हमेशा पानी भरकर खड़ी की जाती हैं। फिर भी वह इस मामले की छानबीन कराएंगे।