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ओडीएफ की राह में रोड़ा बने 30 सचिवों का वेतन रोका

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फतेहपुर। गांवों को खुले में शौचमुक्त करने की राह में रोड़ा बन रहे पंचायत सचिवों पर मंगलवार शाम बड़ी कार्रवाई की गई। जिलाधिकारी के आदेश पर तीस पंचायत सचिवों का वेतन रोक दिया गया।


15 सितंबर तक जनपद के तकरीबन 1300 गांवों को खुले में शौचमुक्त किया जाना है। इसके सापेक्ष अभी तक करीब सवा चार सौ गांव ओडीएफ हुए हैं। एक माह में ओडीएफ का लक्ष्य पूरा करने के लिए सभी पंचायत सचिवों को काम में तेजी लाने के निर्देश दिए गए थे। खजुहा विकास खंड के चौदह, अमौली विकास खंड के सात और देवमई ब्लाक के ग्यारह पंचायत सचिवों ने करीब साढ़े छ: हजार शौचालयों का पैसा खातों में रोक रखा था।
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इस लापरवाही पर डीएम के आदेश पर डीपीआरओ अजय आनंद सरोज ने सभी तीस पंचायत सचिवों के वेतन निकालने पर रोक लगा दी है। इन्हें कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए स्पष्टीकरण तलब किया गया है। डीपीआरओ ने बताया कि यदि 25 अगस्त तक सचिवों का संतोषजनक जवाब नहीं आता है तो निलंबित कर दिया जाएगा।

इन पर हुई कार्रवाई
- खजुहा विकास खंड के ग्राम पंचायत अधिकारी सुरेंद्र कुमार, रामबाबू कुशवाहा, अवधलाल सोनकर, बच्छराज, विवेक उत्तम, संजय मिश्र, रामखेलावन, अरुण उत्तम, अर्पिता दुबे, भगवानदास, अशोक कुमार, मो. असलम, विजय कुमार और सूर्यभान का वेतन रोका गया।
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- अमौली विकास खंड के पंचायत सचिव अरविंद पटेल, अमित कुमार, जितेंद्र कुमार, कैलाशचंद्र, बृजेश कुमार वर्मा, कौशल किशोर और हरिओम का वेतन रोका गया।
- देवमई ब्लाक के पंचायत अधिकारी रणधीर सिंह, अरविंद कुमार, अखिलेश कुमार, बलराम शर्मा, सूर्यभवन, लखनलाल, राजकुमार, जितेंद्र कुमार, रामप्रताप, प्रवीण सिंह चौहान और गौरव सोनकर का वेतन रोका गया।




ओडीएफ की राह में रोड़ा बने 30 सचिवों का वेतन रोका
डीएम के आदेश पर डीपीआरओ ने की कार्रवाई
अमर उजाला ब्यूरो
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