फतेहपुर। मौसम के बिगड़ते तेवरों से एक ओर जहां हृदय और दमा रोगियों के लिए दिक्कत बढ़ गई हैं वहीं बच्चे निमोनिया की चपेट में आ रहे हैं। जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ कक्ष में प्रतिदिन 60 से 70 बच्चे इलाज कराने आ रहे हैं। इनमें आधे से ज्यादा बच्चे निमोनिया पीड़ित हैं।
गुरुवार को जिला अस्पताल के बाल रोग विभाग में मरीजों की भीड़ रही। लोग डाक्टर के लिए अपनी बारी का इंतजार करते मिले। कोराई से आई सुनीता ने बताया कि उनका पांच वर्षीय बेटा दो दिन से तेज सांस ले रहा है। डॉक्टर ने बताया कि निमोनिया हो गया है। इसी प्रकार सथरियांव से आए विनोद ने बताया कि उनका तीन वर्षीय
बेटा सर्दी-जुकाम से परेशान है। रात भर सो नहीं पाता। डॉक्टर को दिखलाया है। बाल रोग विशेषज्ञ डा. मूलचंद्र ने बताया कि निमोनिया किसी भी उम्र के व्यक्ति को प्रभावित कर सकता है। हालांकि यह नवजात और छोटे बच्चों में अधिक होता है। निमोनिया अचानक से एक दो दिन में भी शुरू हो सकता है या फिर धीरे-धीरे कई दिनों में सामने आता है। कई बार यह पता लगाना मुश्किल होता है। सर्दी-जुकाम, निमोनिया के शुरुआती लक्षणों में से एक है।
बाल रोग विशेषज्ञ डा. जेके उमराव ने बताया कि निमोनिया एक तरह का छाती या फेफड़े का संक्रमण है, जो दोनों फेफड़ों को प्रभावित करता है। इसमें फेफड़ों में सूजन आ जाती है और तरल पदार्थ भर जाता है। बच्चों को खांसी होती है और सांस लेना मुश्किल हो जाता है। निमोनिया सर्दी-जुकाम या फ्लू के बाद हो सकता है। नवजात और छोटे बच्चों में रेस्पिरेटरी सिंसिशियल वायरस के अटैक से निमोनिया हो जाता है।
12- जिला अस्पताल में बच्चे का इलाज करते बाल रोग विशेषज्ञ।
बच्चों में निमोनिया का खतरा बढ़ा
- जिला अस्पताल में प्रतिदिन 25 से 30 बच्चे आ रहे
अमर उजाला ब्यूरो