पूरा जिला ही सूखे की चपेट में है। इससे किसानों की दयनीय स्थिति है। इसके बाद भी 125 राजकीय नलकूप बंद हैं। जबकि नलकूप विभाग की साप्ताहिक रिपोर्ट के मुताबिक 30 से 35 नलकूप ही बंद हैं।
जिले में 615 राजकीय नलकूप लगे हैं, जिसमें डेढ़ सौ नलकूप बिजली न मिलने और अन्य वजहों से बंद हैं। इसमें करीब 50 नलकूप कई साल से खराब हैं।
40 राजकीय नलकूपों का जलस्तर नीचे जाने से पानी देना बंद हो गया है। 35 नलकूप यांत्रिक व बिजली की खराबी का शिकार हैं। राजकीय नलकूप खंड के वर्कशॉप में फुंकी मोटरें भरी पड़ी हैं। नलकूप आपरेटर मोटर सही कराने के लिए वर्कशॉप के चक्कर लगा रहे हैं। नलकूप खराब होने से फसल सिंचाई की समस्या अमौली, खजुहा, असोथर, विजईपुर और धाता विकास खंड के तिरहार क्षेत्र में सबसे अधिक है। निजी नलकूपों की संख्या कम होने से लोग फसलों की सिंचाई नहीं कर पा रहे हैं।
विजईपुर विकास खंड क्षेत्र के गिरधरपुर गांव के किसान लक्ष्मी निषाद, सुरेश यादव, गंज के रामकिशोर ने बताया कि सूखा की वजह से असिंचित फसलें भी सूख रही हैं जिनके पास सिंचाई के निजी साधन हैं, उनकी फसलें सही हैं। गांव में लगा राजकीय नलकूप कई साल से बंद पड़ा है। नलकूप सही कराने की शिकायत अधिकारियों से की थी, लेकिन छह माह बीतने के बाद भी सुनवाई नहीं हुई है।
‘यमुना तिरहार के कई गांव में जलस्तर बहुत नीचे चला गया है, जिनमें अब पाइप नहीं डाले जा सकते हैं। ऐसे नलकूपों की सूची भी प्रशासन को दी गई है। जिन नलकूपों की मोटर फुंकी है, उनको सही कराकर तत्काल सिंचाई व्यवस्था दुरुस्त कराई जा रही है।’
एके सिंह, अधिशासी अभियंता, राजकीय नलकूप खंड