अमर उजाला ब्यूरो
फतेहपुर। बसपा में जल्द बड़ा फेरबदल हो सकता है। इसके पीछे संगठन को अच्छे से मजबूती न मिलना माना जा रहा है। पार्टी का निकाय चुनाव में प्रदर्शन दयनीय रहा। हाल ही में बसपा सुप्रीमो पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के जन्मदिन पर अपेक्षित भीड़ न जुटना भी एक बड़ी वजह है। सूत्राें की मानें तो फरवरी के पहले पखवारे में कुछ नेताओं पर नाकामी की गाज गिरनी तय है।
जिले की तीन सिटिंग विधानसभा सीट गंवाने वाली बसपा ने पार्टी सिंबल पर पूरे दमखम से निकाय चुनाव लड़ने का सबसे पहले ऐलान किया था। इस चुनाव में भी बसपा कुछ खास करामात नहीं कर सकी। केवल जहानाबाद नगर पंचायत सीट बसपा ने जीती। इस सीट की जिताऊ गणित पर मुस्लिम प्रत्याशी का आर्थिक रूप से मजबूत होना माना गया। बिंदकी नगर पालिका अध्यक्ष पद का चुनाव बसपा नहीं जीत सकी। यहां से बसपा के पूर्व जिलाध्यक्ष चुनाव लड़कर तीसरे स्थान पर रहे। सदर सीट पर नगर पालिका चेयरमैन पद के चुनाव में बसपा चौथे स्थान पर रही। जबकि यहां से पार्टी ने पूर्व चेयरमैन की पत्नी को उतारा था।
किशनपुर, बहुआ, हथगाम में तो बसपा प्रत्याशियों को सिरे से नकार दिया गया। हथगाम नगर पंचायत क्षेत्र में बसपा के जिलाध्यक्ष रहते हैं। यहां बसपा से चेयरमैन पद के प्रत्याशी को हजार वोट बटोरने के लाले रहे। सूत्रों की मानें तो निकाय चुनाव की नाकामी के साथ ही 15 जनवरी को जिले स्तर पर हुए बसपा सुप्रीमो मायावती के जन्मदिन पर अपेक्षित भीड़ न जुटना होने वाली कार्रवाई एक और वजह बनने जा रहा है।
सूत्रों का कहना है बसपा सुप्रीमो पांच फरवरी को दिल्ली से लखनऊ लौट रही हैं। 10 फरवरी को वह जिलों के संगठन की समीक्षा करने जा रही हैं। इसी समीक्षा में कई बसपाई पदमुक्त हो सकते हैं। दूसरी ओर स्थानीय बसपा में संगठनात्मक बदलाव के संकेत हैं। यही वजह है कि कई नेताओं ने जिलाध्यक्ष पद पर दावा करना शुरू कर दिया है। गोटे बिछाई जा रही हैं। इनमें एक पूर्व जिलाध्यक्ष भी शामिल हैं।