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फ्लैग: यमुना में अवैध खनन रोकने को प्रशासन सख्त

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लिफ्टर और पोकलैंड नहीं चलने दी जाएंगी
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फतेहपुर। यमुना में अवैध खनन रोकने के लिए प्रशासन सख्त हो गया है। मौरंग निकालने के लिए लिफ्टर, पोकलैंड और जेसीबी का प्रयोग करने वालों पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।

इसके लिए तीनों तहसीलों के एसडीएम को अलर्ट कर दिया गया है। अवैध खनन रोकने के लिए पुलिस भी सक्रिय हो गई है।

छह जून 2015 को पूर्व विधायक अभिमन्यु सिंह उर्फ बीरन यादव के बेटे विपिन यादव के तिलक समारोह में शिकरत करने आए तत्कालीन सीएम अखिलेश सिंह यादव से जिले में व्यापक पैमाने पर अवैध खनन की शिकायत की गई थी।
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शिकायत पर सीएम ने उसी दिन इलाहाबाद के कमिशभनर को निलंबित कर दिया था। सात जून को इस जद में डीएम और खनन अफसर आए थे। इतना सब होने के बावजूद अवैध खनन करने वालोें के हौसले पस्त नहीं हुए। सूबे की मौजूदा योगी सरकार ने खनन के नाजायज खेल पर अंकुश लगाने को ई-टेंडरिंग के जरिए पट्टे दिए हैं।

ऐरई घाट पर छह भूखंड हैं। इनमें से पांच का पट्टा मध्य प्रदेश की एक फर्म को मिला है। प्रशासन ने अवैध खनन के चल रहे खेल के पिछले अनुभव को जेहन मेें रखते हुए अपने इरादे साफ कर दिए हैं।
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डीएम मदन पाल आर्य का कहना है कि किसी भी दशा में अवैध खनन नहीं होने दिया जाएगा। नियमों के तहत काम होंगे। मौरंग निकालने के लिए लिफ्टर और पोकलैंड नहीं चलने दी जाएंगी। यह मशीनें चलती मिलीं तो पट्टाधारक के खिलाफ कठोर कार्रवाई होगी।

- डीएम ने कहा नियमों के तहत ही होगा खनन, तीनों तहसील के एसडीएम को किया अलर्ट
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