दरवाजे पर पूजा जा रहा था दूल्हा, बाबा की मौत
खागा। ससुराल में दरवाजे पर दूल्हा पूजा जा रहा था, तभी दुल्हन के बाबा की मौत हो गई। पिता ने यह राज चंद लोगोें को बताकर सीने में ही दफन कर लिया।
सादे तरीके से विवाह की रस्में हुईं। फेरे के बाद पता चलते ही दुल्हन बिलखने लगी। परिजनों ने समझाकर सुबह विदा किया। दुल्हन बाबा की मौत के गम को सीने में दबाए ससुराल को विदा हुई।
नगर के जीटी रोड स्थित सुखदेव इंटर कालेज के पास रहने वाले फर्नीचर कारीगर उमाशंकर विश्वकर्मा की बेटी लक्ष्मी की शादी थी। सोमवार को जिले के हरदौली गांव से छोटे लाल के बेटे अजय कुमार बारात लेकर आए थे।
बारात आई तो लक्ष्मी के बाबा शिवलाल उर्फ गोलीबाज की भी खुशी का ठिकाना न रहा। वह बारातियों और जनातियों के बीच खुशियां बांट रहे थे कि श्वांस की बीमारी के चलते तबियत खराब हो गई।
उमाशंकर पिता शिवलाल को लेकर शहर के नर्सिंग होम पहुंचे। कुछ रिश्तेदारों को उनके पास छोड़कर बेटी के विवाह की रस्में निभाने के लिए घर लौट गए। रात नौ बजे अगवानी में दूल्हा पूजने का कार्यक्रम शुरू हुआ।
उसी समय उनके मोबाइल पर पिता की मौत की खबर आ गई। उन्होंने कुछ खास रिश्तेदारों को ही गम भरी सूचना दी। परिजनों व रिश्तेदारोें में तय हुआ कि दुल्हन और दूल्हे को बताए बिना रस्में पूरी की जाएं।
तड़के चार बजे तक सारी रस्में पूरी कर ली गईं। इसकेे बाद दूल्हा और दुल्हन को जानकारी दी गई। बाबा की मौत की खबर सुनते ही लक्ष्मी का खुशियों से दमकता चेहरा फक्क पड़ गया। आंखों से आंसुओं की धार बह चली। दुखी मन से वह ससुराल के लिए विदा हुई।
- सादे तरह से निभाई गईं रस्में, फेरे के बाद बताया गया ,दुखी मन से ससुराल विदा हुई दुल्हन