फतेहपुर। सहकारी समिति के किसानों की बकाएदारी जमा कराना विभाग के लिए टेढ़ीखीर बन गया है। समिति के सचिवों और सहकारिता बैंक के अभिलेखों में लाखों रुपये का अंतर है। सहकारिता विभाग के अधिकारी इस बकाया धनराशि को जमा कराने के लिए दस्तावेजों का मिलान करने में जुटे हैं। समिति व बैंक की धनराशि में लाखों रुपये का हेरफेर हैं। ऐसे में बैंक के आधार पर धनराशि जमा कराना नामुमकिन दिखाई दे रहा है। इससे किसानों को सहकारी समिति से लाभ मिलने की प्रक्रिया में अभी विलंब होना तय है।
किसानों को सहकारी समितियों से पहले की तरह लाभ दिलाने के लिए अधिकारियों ने पहल शुरू की है। प्रत्येक समिति के किसानों की बकायेदारी को जमा करने के लिए सहायक निबंधक एवं सहायक आयुक्त सहकारिता ने दस्तावेज तलब किए हैं। इसमें किसानों को खाद के लिए ऋण देने वाली सहकारी बैंक व खाद, बीज देने वाले सचिवों ने अपने-अपने रिकार्ड दिए हैं। इसके मिलान में लाखों रुपये का अंतर आया है। बानगी के तौर पर मेवली समिति में सचिव नेकपाल के अनुसार सात लाख 85 हजार 540.60 रुपये किसानों का बकाया है, लेकिन
सहकारिता बैंक की रिपोर्ट में मेवली समिति के किसानों का 25 लाख 26 हजार 649.04 रुपये बकाया है। बकंधा समिति में एक लाख 18 हजार 153 रुपये और सहकारिता बैंक के अनुसार सात लाख 17 हजार 71.96 रुपये किसानों का बकाया है। इसी प्रकार हरिहरगंज समिति में 22 लाख 54 हजार 897.22 रुपये और बैंक के अनुसार किसानों को खाद, बीज के लिए 93 लाख 14 हजार 394.04 रुपये बकाया है। देवरी लक्ष्मनपुर साधन सहकारी समिति के सचिव के अनुसार एक लाख 48 हजार 50.59 रुपये बाकी हैं और सहकारी बैंक ने 21 लाख 95 हजार 818.96 रुपये किसानों का बकाया दिखाया है।
वर्जन
सहायक निबंधक एवं सहायक आयुक्त सहकारिता नयन सिंह ने बताया कि समिति से किसानों को पहले जैसी सुविधाएं दिलाने के लिए बकाया धनराशि जमा कराने की रिपोर्ट तैयार की जा रही है। इसके लिए बैंक व समिति के दस्तावेज मांगे गए हैं। इन दोनों की रिपोर्ट में लाखों रुपये का अंतर आ रहा है। अब जिन किसानों ने लोन पर खाद, बीज समिति से खरीदा होगा, उनकी चेक आहरण व भुगतान रजिस्टर से मिलान कराया जाएगा, फिर शासन को रिपोर्ट भेजी जाएगी।