खनन विभाग की ओर से सीज की गई 62 लाख की मौरंग चोरी किए जाने के मामले में खनन निदेशक के निर्देश के बाद पुलिस प्रशासन हरकत में आया है। मौरंग डंप क्षेत्र के एक नेता के इशारे पर ही उठाए गए थे और बाद में पुलिस ने अज्ञात पर मामला दर्ज किया था।
पुलिस मामला दबाकर बैठ गई थी। खनन निदेशालय के सख्त रवैये पर कार्रवाई तेजी से बड़ी है। पुलिस ने आनन-फानन में 11 मौरंग कारोबारियों के नाम विवेचना में बढ़ाए हैं।
खनन और राजस्व विभाग की टीम ने अवैध मौरंग डंप की जांच के दौरान 6 अगस्त 2020 को लखनऊ मार्ग पर बेरागढ़ीवा और देवरी मोड़ पर रोड किनारे 27 डंप सीज किए थे।
सीज डंप पुलिस की सुपुर्दगी में थे। इसके बाद चोरी हो गए थे। सितंबर में डंप की नीलामी का कोई आवेदन नहीं पहुंचा तो मामले का खुलासा हुआ था। बीट सिपाही विजय मिश्रा की ओर से पुलिस ने 25 सितंबर को मौरंग चोरी की अज्ञात लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की थी। उसके बाद पुलिस ने मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया।
मामले के तूल पकड़ने पर जिला प्रशासन की किरकिरी हुई तो मामला खनन निदेशक तक पहुंचा। खनन निदेशालय ने डीएम संजीव सिंह को पत्र जारी कर 27 सितंबर को कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी थी। डीएम के निर्देश पर जांच तेज हुई।
विवेचक प्रवीण चक्रवर्ती ने कामता सिंह पुत्र पूती सिंह, चंद्रबीर सिंह, सूर्यबीर सिंह पुत्र उदय बीर सिंह, सत्यम पुत्र दयाराम, शिव प्रसाद पुत्र शिवनंदन, श्यामवीर, भोला सिंह पुत्र जगरूप सिंह निवासी बेरागढ़ीवा, कैलाश पुत्र गया प्रसाद निवासी बड़ागांव, आकाश पटेल, विकास पटेल पुत्र गया प्रसाद निवासी कढ़ीवा मजरे बेरागढ़ीवा और मनोज पांडेय पुत्र राजेंद्र पांडेय निवासी सहनीपुर को प्रकाश में लाया है।
प्रभारी निरीक्षक सत्येंद्र सहिं भदौरिया ने बताया कि अभी जांच जारी है और भी नामों का खुलासा हो सकता है। आरोपियों के खिलाफ गैंगस्टर की भी कार्रवाई की जाएगी।
मामले की जांच में कुछ पुलिस कर्मियों पर भी कार्रवाई की गाज गिर सकती है। मौरंग पुलिस की सुपुर्दगी से गायब हुई थी। पुलिस की ड्यूटी भी लगी रहती थी, इसके बाद भी मौरंग गायब होना सवाल पैदा करता है। ड्यूटी में लगाए जाने वाले पुलिस कर्मियों और तत्कालीन थानेदार भी जांच की आंच आ सकती है।
सीज डंप चोरी के बाद इसमें शामिल लोगों ने प्रतिपूर्ति की मशक्कत चालू की है। डंप से चोरी मौरंग को पूरा किया जाने लगा है। ऐसा करने के बाद मौरंग चुराने वालों के पास एक रास्ता खुल सकता है। वह दोबारा सीज डंप की नाप कराने की मांग कर सकते हैं। दोबारा नाप होने पर चोरी मौरंग की मात्रा उतनी ही निकल सकती है।
खनिज विभाग का इन डंपों की नीलामी कर सकता है। लेकिन चोरी के दर्ज मामले में पुलिस को बरामदगी दिखानी होगी।