सहसपुर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन ठाकुर देवकीनंदन महाराज ने कृष्ण की लीलाआें का वर्णन किया। उन्हाेंने कहा कि मोहन प्रेम के बिना नहीं मिलते हैं।
कथा व्यास ने कहा कि हमें किसी भी वस्तु पर अभिमान नहीं करना चाहिए। गोपियों को अभिमान हुआ कि कृष्ण उनके वश में हैं । भगवान उन्हें छोड़कर चले गए थे। उसी प्रकार जब हमें किसी वस्तु पर अभिमान हो जाता है तो भगवान उसे हम से छीन लेते हैं।
हमें अपना रिश्ता दुनिया के नाशवान जीवों से न बनाकर भगवान से बनाना चाहिए। भगवान के साथ बनाया रिश्ता अमर हो जाता है । जब हम पर संकट आते हैं तो भगवान उस रिश्ते को निभाने के लिए हमारे साथ खड़े हो जाते हैं। जीव को भगवान से प्यार इस प्रकार करना चाहिए जैसे एक अबोध बालक अपनी मंा से करता है। जब तक हम अबोध बनकर भगवान से प्रेम नहीं करेंगे तब तक हम भगवत प्राप्ति नहीं कर सकते।
कथा व्यास ने कहा कि हमें भगवान की भक्ति बिना कोई दिखावा नहीं करना चाहिए। जब हम किसी भी प्रकार का दिखावा करके भगवान की वंदना करते हैं तो भगवान हमारी वंदना को स्वीकार नहीं करते। इससे पहले यजमान डा. अनुपम दुबे एडवोकेट ने पत्नी के साथ गिर्राज भगवान का पूजन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।