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तंबू की नगरी में बहने लगी भक्ति की बयार

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पांचालघाट स्थित रामनगरिया में दीपकों से सजा गंगा तट। संवाद - फोटो : FARRUKHABAD
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फर्रुखाबाद। पांचाल घाट गंगा तट पर बसी राम की नगरी का हवन पूजन के साथ विधिवत शुभारंभ हो गया। पौष पूर्णिमा पर भोर में ही गंगा के सभी तट हर-हर गंगे के उद्घोष से गूंजने लगे। शाम को गंगा में दीयों से दीपदान किया। इससे तट जगमग हो गया। वाराणसी के आचार्यों ने गंगा आरती की। घंटा-घड़ियालों व श्रद्धालुओं के जयकारों से कल्पवास क्षेत्र गूंजने लगा।
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मेले का शुभारंभ सिटी मजिस्ट्रेट दीपाली भार्गव, श्रीपंचनाम जूना अखाड़ा के अध्यक्ष सत्यगिरी महाराज, वैष्णव संप्रदाय अध्यक्ष बाबा बालकदास, बजरंगदासजी ने यज्ञ में आहुतियां देकर किया। आचार्य शिवकुमार व आचार्य प्रदीप नारायण शुक्ल ने मंत्रोच्चार किए।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने मिट्टी के दीयों से गंगा आरती लिखा। वाराणसी के आचार्य लक्ष्मी नारायण, आचार्य विकास शुक्ल, विकास पांडेय, पवन पाठक, सत्यम मिश्रा ने गंगा आरती की। शंख, घंटा-घड़ियाल की धुन के साथ जयकारे गूंजने लगे। मेला क्षेत्र भक्तिमय हो गया।
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सिटी मजिस्ट्रेट के साथ श्रद्धालुओं ने गंगा में दीपदान किया। पूर्णिमा से ही मेला क्षेत्र में धार्मिक आयोजन शुरू हो गए। बरगदिया घाट क्षेत्र में ठाकुरजी को मंदिर में स्थापित कर पूजा-अर्चना की गई। संतों को भंडारे में प्रसाद खिलाया गया। मेला गेट पर साधना श्रीवास्तव, नेहा सक्सेना, हेमलता श्रीवास्तव ने रंगोली बनाकर मेला कार्यालय को सजाया।
गंगा में नाव चलाने पर लगाई रोक
मेला क्षेत्र में गंगा के तट पर दर्जनों नाव चल रही हैं, लेकिन नाविक कोविड नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। इससे मेला सचिव ने 23 जनवरी तक गंगा में नाव चलाने पर रोक लगा दी। बताया कि चालकों को कोविड टीका और जांच की रिपोर्ट दिखाने के बाद नाव चलाने की अनुमति दी जाएगी। इसके लिए थाना प्रभारी परिचय पत्र जारी करेंगे।
कड़ाके की सर्दी से भीड़ कम
दो दिन से हाड़ कंपाने वाली सर्दी के कारण गंगा स्नान करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या कम रही। हालांकि लोग दिन भर आते-जाते रहे। पुरोहित समिति के अध्यक्ष मनोज कुमार ने बताया कि सर्दी व कोरोना से स्नान कम हुआ है।
सवा लाख शिवलिंग का किया गया विसर्जन
सीढ़ी नंबर दो गंगा के तट पर आचार्य कृष्ण मुरारी आदि आचार्यों व भक्तों ने सवा लाख पार्थिव शिवलिंग सुबह सात बजे से बनाने शुरू किए। शाम चार बजे तट पर पूजा अर्चना के बाद गंगा में विसर्जन किए गए। यह अनुष्ठान सात दिन तक चलेगा।

पांचाल घाट पर गंगा आरती करते आचार्य। संवाद- फोटो : FARRUKHABAD

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