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बंदरों के डर से करते चौका की रखवाली

Sun, 29 Mar 2015 11:36 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला फर्रुखाबाद
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ब्लाक क्षेत्र के गांव सिकंदरपुर खास में छह साल से बंदरों के आतंक से ग्रामीण परेशान हैं। बंदरों के हमले से छह माह पहले एक महिला की छत से गिरकर मौत भी हो चुकी है। हालात यह हैं कि भोजन बनाने के दौरान बंदरों की रखवाली करनी पड़ती है। परिजन बच्चों को अकेले स्कू ल भेजने से कतराते हैं।
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गांव में बंदरों के आतंक से खुले में रोटी बनाना दुश्वार है। रोटी बनाने के दौरान लाठी लेकर चौका तक की पहरेदारी करनी पड़ती है। बच्चे खेलकूद भूल गए हैं। इन्हें अभिभावक स्कूल छोड़ने जाते हैं। हाथ में इनके डंडा रहता है। डिश की छतरी लगवाने का गांव के लोग जोखिम नहीं उठा पाते। घर के दरवाजे हमेशा बंद रखना मजबूरी है। गांव में रहने वालों के यहां मेहमान भी आने से कतराते हैं।

गांव सिकंदरपुर की सावित्री देवी पत्नी संतराम ने बताया कि छह माह पहले बंदरों के हमले से वह छत से गिरकर घायल हो गई थीं। अब तो छत पर तभी, जाती हैं जब कोई डंडा लेकर उनके साथ जाए। गिरिजा देवी पत्नी सुरेंद्र मिश्र का कहना है कि तीन माह पूर्व वह छत पर काम कर रही थीं। बंदर दौड़ पड़े। भागीं तो छत से गिरकर घायल हो गईं। आज भी दवा चल रही है। शिव कुमार कहते हैं कि उनकी पत्नी अंजली देवी पिछली गर्मियों में छत पर काम कर रही थीं। अचानक बंदर कंधे
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पर आकर गिरा, जिससे वह छत से गिर पड़ीं और मौके पर ही पत्नी की मौत हो गईं। पिंटू जोशी का कहना है कि दो दिन पहले उनकी बेटी प्रतिज्ञा को स्कूल से घर लौटते समय बंदर ने काट लिया था। कटोरी देवी कहती हैं कि भोजन बनाने के दौरान डंडा लेकर रखवाली करनी पड़ती है। किसान सुग्रीव सिंह, लालाराम, श्रीदयाल, अनिल कुमार, रवींद्र कुमार, रामबाबू, खुशीराम, राजीव शुक्ला, भल्लन, रिंकू  और दीपू का कहना है कि बंदर फसल भी बर्बाद करते हैं। इसके चलते बंदरों से भी

फसल की रखवाली करनी पड़ती है। दुकानदार विमलेश कुमार का कहना है कि जरा सी चूक होने पर बंदर दुकान में रखा खानपान का सामान उठा ले जाते हैं। बंदरों का आतंक यह है कि घर में भोजन बनने के दौरान डंडा लेकर बैठना पड़ता है। घरों में लगी डिश की छतरी भी बंदर तोड़ देते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार जिला प्रशासन और प्रधान से बंदरों को पकड़वाए जाने की मांग की जा चुकी है लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
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