फर्रुखाबाद। शुक्रवार सुबह विजिलेंस टीम ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय से वरिष्ठ लेखाकार (उप निरीक्षक लेखा) हरेंद्र सिंह चौहान को रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया।
इस दौरान हरेंद्र सिंह चिल्लाए कि क्यों पकड़ रहे हो तो कार्यालय में बैठे कर्मचारी बाहर निकल आए, यह देख टीम ने स्पष्ट कहा कि वह विजिलेंस से हैं, कोई पास मत आना।
इस मामले में जैसे ही टीम कार्यालय में पहुंची, शिकायतकर्ता आदित्य पटेल ने इशारे से हरेंद्र चौहान की पहचान कराई और बताया कि वही उससे रिश्वत की मांग कर रहा है। इसके बाद आदित्य ने इशारे से वरिष्ठ लेखाकार को बाहर बाहर बुलाया। बरामदे में हरेंद्र के आते ही आदित्य ने 15 हजार रुपये रजिस्टर में रखकर उन्हें थमा दिया।
हरेंद्र चार कदम आगे बढ़े और रुपये निकालकर जेब में रख लिए। तभी टीम ने उन्हें दबोच लिया और खींचकर ले जाने लगे। हरेंद्र जोर से चिल्लाए और कहा यह क्या कर रहे हो।
उनकी आवाज सुन और बाहर का माहौल देख आसपास के कार्यालयों से भी कर्मचारी बाहर निकल आए। उन्होंने हरेंद्र को छोड़ने के लिए कहा। तभी टीम के सदस्यों ने कहा, पास मत आना यह विजिलेंस टीम है। आधिकारिक कार्रवाई हो रही है। विजिलेंस टीम ने बिना देरी किए हरेंद्र को कार में बैठाया और तेजी से जेएनवी रोड स्थित लोक निर्माण विभाग के गेस्ट हाउस पहुंच गई। इसके बाद कार्यालय में अफरातफरी मच गई। (संवाद)
घनिष्ठ मित्र थे लेखाकार हरेंद्र चौहान और शिकायतकर्ता आदित्य
रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़े जाने के बाद पुलिस अधीक्षक कार्यालय में तरह–तरह की चर्चाएं तेज हो गई हैं। कार्यालय कर्मचारियों ने बताया कि शिकायतकर्ता आदित्य पटेल और वरिष्ठ लेखाकार हरेंद्र चौहान के बीच पहले से बेहद घनिष्ठ संबंध थे। दोनों रोजाना सुबह कुछ समय साथ बैठते थे और उनके बीच अच्छी दोस्ती थी।
कर्मचारियों के अनुसार, दोनों के बीच नजदीकियां इतनी थीं कि किसी को अंदेशा भी नहीं था कि यही मामला आगे चलकर विजिलेंस कार्रवाई तक पहुंच जाएगा। अब जब हरेंद्र चौहान रिश्वत लेते पकड़ा गया, तो कर्मचारियों में यह चर्चा गहरी हो गई है कि आखिर ऐसा क्या हुआ, जिससे आदित्य पटेल को अपने ही परिचित दोस्त के खिलाफ इतनी बड़ी कार्रवाई कराने पर मजबूर होना पड़ा।
फोटो- 11 घटना के बाद पुलिस कार्यालय में आपस में चर्चा करते पुलिस कर्मी। संवाद