फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अब दीमक और सूड़ी चट कर रही गेहूं

Sat, 18 Apr 2015 11:18 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला फर्रुखाबाद
विज्ञापन
विज्ञापन
गेहूं किसानों की आफत कम होने का नाम नहीं ले रही है। बुधवार को जोरदार बरसात के बाद कटी पड़ी फसल में दीमक लग गया है। यह तेजी से बालियों और नरई (पौधों) को चट कर रहा है। दीमक के साथ ही सूड़ी व नन्हें कीड़े भी फसल को नुकसान पहुंचा रहे हैं। अभी 60 फीसदी फसल खेत में ही है। तेजी से बढ़ रहे दीमकों के कुनबे से एक बीघा में 20 से 25
विज्ञापन


किलो गेहूं के नुकसान का अंदेशा है। सुबह व रात की नमी से दीमकों की तादाद खूब बढ़ रही है। गट्ठरों की नमी से अभी तीन दिन तक कटाई की संभावना ही नहीं लग रही है। इससे यह नुकसानी और बढ़ सकती है। मड़ाई के बाद भी दीमक गेहूं के साथ घर पहुंच कर किसानों का संकट बढ़ाएगी।

इस बार रबी की सीजन में 142094 हेक्टेयर में बुवाई हुई थी। इसमें 76,244 हेक्टेयर रकबे में गेहूं बोया गया। बुधवार की बरसात के बाद 50 फीसदी से ऊपर नुकसान हो चुका है। अब दीमक, नन्हें कीट और सूड़ी आफत मचा रही है। सबसे बड़ा खतरा दीमक से है। यह तेजी से फैल रहा है। दीमक की जद में बाली और नरई दोनों हैं। यह दानों को खा रहा है। शनिवार
विज्ञापन


की दोपहर को बदरेपुर के विकलांग किसान बबलू गट्ठरों को खेत में पलट रहे थे। दीमक और सूड़ी के झुंड देख कर इनके होठों से आह निकल जाती थी। इन्होंने बताया कि एक बीघा में करीब सवा क्विंटल पैदावार का अनुमान था। 20 से 25 किलो पैदावार दीमक साफ कर जाएगा। पता नहीं है कितना गेहूं घर ले जा पाएंगे।

बहोरिकपुर के किसान अनुज कुमार ने बताया कि पूरे इलाके में यही हाल है। दीमक तेजी से  बढ़ रहा है। यह दानों को मिट्टी बना रहा है। मजबूरी है कि गट्ठरों के सूख न पाने से मड़ाई नहीं कर पा रहे हैं। अगर दीमकों का हमला बढ़ता रहा तो मड़ाई से भी कोई फायदा नहीं होगा। लागत तो पहले ही डूब गई है। महमदपुर अमलैया के किसान राजपाल दोपहर को

पूरे कुनबे के साथ खेत में गट्ठरों को पलट रहे थे। गट्ठर पलटते तो दीमक तेजी से रेंगकर दूसरे गट्ठरों की ओर भागने लगते। इससे इनके बेटे सुदामा व रवीश के रोंगटे खड़े हो जाते थे।  इन्हें लगता की दीमक इनके भविष्य क ो कुतर रहे हैं। राजपाल बताते हैं कि मड़ाई के बाद भी दीमक गेहूं के साथ जाएगा। इससे यह आगे भी नुकसान पहुंचाएगा। बंदरखेड़ा गांव के हंसराज व ओंकार कहते हैं कि दीमकों से बचने के लिए गट्ठरों के बाली वाले हिस्से को ऊपर की ओर रख कर खड़ा कर रहे हैं।

केस हिस्ट्री: 1
बदलेपुर के विकलांग किसान बबलू क हते हैं कि पिता मरने से पहले 50 हजार रुपया केसीसी का कर्ज छोड़ गए थे। पेट काटकर इसे चुकाया। पहले बेमौसम बरसात और अब दीमक तबाही मचा रहे हैं। 4 हजार रुपया कर्ज लिया है। इस पर  ब्याज चल रहा है।  पैसे न होने से मां ज्ञान देवी का इलाज बंद है।

केस हिस्ट्री : 2
बहोरिकपुर के किसान अनुज कहते हैं कि परिवार में पत्नी ममता, दो बेटे व बेटी है। 10 बीघा में गेहूं बोया था। बरसात से बची फसल में अब दीमक का कहर है। घर में दीवारें खड़ी हैं। तीन साल से लेंटर नहीं डलवा पा रहे हैं। अब तो कर्ज से बसर होगी।

केस हिस्ट्री :  3
महमदपुर अमलैया के किसान राजपाल ने बटाई पर 15 बीघा में गेहूं बोया था। फसल के लिए 8 हजार रुपया कर्ज लिया। यह कर्ज ब्याज पर है। यह कहते हैं कि बर्बादी से कुछ नहीं बचेगा। कर्ज नहीं चुका पाएंगे। बेटे मनीष के लिए अच्छे रिश्ते आ रहे थे। इतनी भी पैदावार नहीं मिलेगी  कि शादी की दावत भी कर पाएं।

नमी के चलते दीमक बढ़ रहा है। यह फ सल को नुकसान पहुंचा रहा है। सूड़ी से भी फसल को नुकसान होगा। फसल के जमीन से छूने वाले हिस्सों में यह ज्यादा नुकसान करेंगे। बाली वाले हिस्से को ऊपर की ओर कर गट्ठर रखने चाहिए। - अतर सिंह यादव, कृषि विशेषज्ञ

40 फीसदी के करीब गेहूं की मड़ाई हो चुकी है। 60 फीसदी फसल खेत में है। इसमें ज्यादातर का कटान हो चुका है। बहुत कम प्रतिशत कटना बाकी है। बुधवार को हुई बरसात के बाद हुए नुकसान का सर्वे करवाया जा रहा है। -एके सिंह, डीडी कृषि
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें