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नलकूप विभाग की स्क्रैप सामग्री में वजन का खेल

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नलकूप विभाग में सीडीओ की जांच के बाद भी कोई असर नहीं दिख रहा है। स्टोर का चार्ज देने में भी खेल हुआ। चार्ज को लेकर हुई जिम्मेदारों में नोकझोंक के बाद मामला सामने आ गया है। नलकूप से निकलने वाले मोटर, बाउल एसेंबली से पीतल के पार्ट गायब हैं। वजन भी कागजों पर कम दर्ज कर खेल किया गया है।
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नलकूप विभाग के स्टोर में सैकड़ों टन लोहे का कबाड़ भरा है। राजकीय नलकूपों से खराब होने वाले मोटर, सबमर्सिबल, पंप, अलग-अलग क्षमताओं की बाउल एसेंबली, रिफलेक्स वाल्व, सीआई बैंड, डिस्चार्ज हेड आदि 63 प्रकार के पार्ट स्टोर के कबाड़ मेंहैं। ये सैकड़ों की तादाद में हैं। इनका कागजों पर वजन कम दिखाया गया है जबकि मौके पर काफी अधिक है। स्थानांतरित अवर अभियंता रूपकिशोर का चार्ज सितंबर में जेई गौरव सक्सेना को दिया गया।
दी गई पत्रावलियों में वजन की हेराफेरी व अन्य पार्ट्स कम या अधिक होने के संबंध में उन्होंने सवाल उठाए। उन्होंने सहायक अभियंता से फोन पर वार्ता की तो उन्होंने गड़बड़ियां समायोजित होने की बात कही।
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यह भी कि अभी तो उनकी यहीं पर तैनाती है। बात न बनने गौरव सक्सेना का चार्ज निरस्त किए बिना ही दूसरे जेई बृजेश दीक्षित को स्टोर प्रभारी बना दिया।
अवर अभियंता गौरव सक्सेना ने बताया कि पुरानी बाउल एसेंबली में पीतल के स्पेयर पार्ट का कोई पता नहीं है। उसके स्थान पर कुुछ स्टील पार्ट दिखाए जा रहे हैं। जो बाउल एसेंबली 50 किलो की दर्शाईगई है, उसका वास्तविक वजन एक क्विंटल से भी अधिक है।
राजकीय नलकूपों में खराबी आने पर उनके स्पेयर पार्ट बदले जाते हैं। मोटर से निकलने वाले पीतल के पार्ट के स्थान पर नए डाले जाते हैं। इन रनिंग आइटम का भी कागजों पर 10 फीसदी ही वजन दर्ज कर खेल चल रहा है। बताया जा रहा कि मासिक लेखा की जांच हो तो खेल खुलकर सामने आ जएगा।
सहायक अभियंता अमर सिंह ने बताया कि अधीक्षण अभियंता ने स्क्रैप नीलामी को रिपोर्ट मांगी थी। उस दौरान पुरानी सूची के आधार पर रिपोर्ट बनाकर भेज दी गई। उसमें वजन ठीक नहीं लिखा है। मौके पर सामग्री का वजन अधिक है, इसकी तौल कराकर दोबारा सूची बनवाई जाएगी। मासिक लेखा में कोई गड़बड़ी नहीं है।
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